Grab the widget  Get Widgets

hind story

Grab the widget  Get Widgets

h ado

yl

ity

adult kahaniya लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
adult kahaniya लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

कुछ हो रहा है क्या बेबी

भाभीजान की चोली का हुक खोलने के लिए मैं एक अरसे से बेताब था कि एक रोज मेरी तकदीर कुछ ऐसे खुली की मौसेरी बहन की चूचियाँ नंगी दिख गईं। वो गर्मी की छुट्टियों में मेरे घर आई हुई थी और मैं भाभी की चुदाई के चक्कर में पड़ा हुआ था।
अचानक ही मेरी नजर गेस्ट रुम में सोई मेरी मौसेरी बहन सायरा के ऊपर पड़ गई। सायरा नाईटी पहन कर सोई हुई थी, उसने अंदर चोली पहनी थी, पर नाईटी का गला बड़ा होने के चलते वो सरक के चोली का दीदार करा रही थी। काली चोली में सफेद चूचियाँ, मैं भाभी की चूचियों को भूल गया। मैंने ध्यान से देखा तो मेरा मन जाकर उन्हें छू लेने को करने लगा।
मैंने चूत को दबा कर चोदने की अपनी इच्छा को अपने अंदर जगते देखा और फिर मैं सायरा के पास चला गया। उसकी नाईटी घुटनों तक चढ़ी हुई थी और उसने पैर मोड़ कर उठाए हुए थे, जिससे कि नीचे से मैं उसकी चड्ढी झांक सकता था। मैंने उसकी नाईटी के नीचे झांका तो सफेद पैंटी उसकी बुर से चिपकी हुई थी। दोनों फांकें चूत की पैंटी के ऊपर से चिपके होने के चलते आकार में आकर एकदम मस्त नजर आ रहीं थीं।
मैंने उसकी चूत के आकार का अंदाजा लगाया और सोचा, वो एक बित्ते की थी, एक बित्ते की चूत और गहराई लगभग दस इंच रही होगी। वो खाते-पीते परिवार की लौंडिया है और उसकी गांड मोटी थी। मैं समझ गया था कि आज मुझे चूत मिलने वाली है। बस मैंने अपने मन से तहजीब के डर को किनारे रखा और दरवाजे की किल्ली लगा दी। अपने सारे कपड़े उतार कर लंड को ठेहुका कर मतलब कि खड़ा करके उसके बगल में लेट गया।
सायरा ने करवट बदली तो उसका एक हाथ सीधा मेरे लंड पर चला गया। किस्मत मुझ पर मेहरबान थी और मैंने अपनी आँखें बंद करके मजा लेना शुरु कर दिया। उसने लंड को पकड़ के ऐसे थाम रखा था जैसे कि उसने कोई गियर थाम रखा हो। थोड़ी देर में उसने करवट बदल के दोनों हाथों से मेरा लंड पकड़ लिया।
अब वो मेरे करीब आ गई थी। उसे अहसास नहीं था कि क्या कर रही है, वो अब मेरे लौड़े को मसल रही थी। मैं चुपचाप था, मैं उसकी चोली को घूर रहा था जिसमें उसके गोरे गोरे कबूतर बंद थे और बाहर निकलने को छटपटा रहे थे।
मैंने उसके उरोजों को पकड़ने के लिए अपने हाथ बढ़ाने चाहे पर रुक गया, अगर उसे अच्छा न लगा तो। वो मुझे बहुत अदब से भाईजान कहती थी। मैं जब्त करके रखा अपनी भावनाओं को और तभी उसने अपनी आँखें खोल दी। मैंने अपनी आँखें बंद कर रखीं थी, जैसे कि मैं कुछ जानता ही न था। वो उठ कर बैठ गई और हैरान रह गई। मुझे नंगा देख और दोनों हाथों से खड़े लंड को पकड़े देख वो दंग थी, पर वो भागी नहीं।
उसने मेरे लंड को पकड़ कर चूमना शुरु कर दिया। आह्ह ! मैं चुपचाप लंड में होने वाली सनसनी को सहता रहा।
मेरा लंड बढ़ कर आठ इंच का हो चुका था, सुपारा फूल कर मोटा। सायरा ने उसे चूसना शुरु कर दिया था और गले में अंदर तक ठेल लिया था। अब मैंने अपनी आँखें खोल लीं। वो शरमा गई और उसने लन्ड छोड़ दिया।
मैं बैठ गया और उसे उठा कर अपने गोद में बिठा लिया, उसके चोली को पकड़ के खोलने लगा और उसे चूमने लगा। वो पागल होने लगी थी, उसने मेरे जीभ को अपने दांतों से लगभग चबाते हुए किस करना शुरु कर दिया था।
मैंने अपने हाथों से उसका मेक्सी उठाया और सफेद चड्डी फाड़ कर रंगीन कंवारी चूत को आजाद कर दिया। अब मैंने उसे पलंग पर लिटा दिया, नाईटी खोल दी, चोली में से एक चूची निकाल कर मसलने लगा। दोनों हाथों से दबाते हुए मैंने उसके बोसे लेना चालू रखा। दोनों हाथों से चूची दबाने से वो कहने लगी- आह्ह भाईजान धीरे धीरे दबाओ, उफ्फ मुझे कुछ हो रहा है।
मैंने पूछा- कहाँ और क्या हो रहा है?
तो बोली- नीचे कुछ हो रहा है।
मैंने कहा- कहाँ?
तो वो शरमा गई।
मैंने पूछा- चूत में कुछ हो रहा है क्या बेबी?
वो बोली- छीः आप कितना गंदा बोलते हो।
मैंने उंगली से उसकी चूत को सहलाते हुए पूछा- इसमें कुछ हो रहा है क्या?
तो वो बोली- हां ! करते रहिए ! अच्छा लग रहा है।
चोली खोल रसपान और स्तनपान किया, अब मैंने उसकी चोली से दूसरी चूची निकाल कर पीना शुरु कर दिया था। जैसे ही अपने मुँह में पूरे चूचे को अंदर करते हुए दांतों से दबाता तो वो आह्ह ! आह्ह ! कर उठती।
मजे से मैंने उसके स्तनपान के बाद उसकी टांगें फैला कर उसकी चूत को चूसना शुरु कर दिया। किसी आईसक्रीम की तरह मैंने च्च्च्चपड़ सपड़ करके उसका रस लेना शुरु किया और वो मजे से सिसकारियाँ लेती रही। उसकी चोली मैंने किनारे रख दी थी।
चूत का रसपान करने के बाद मैने सायरा की गांड तले तकिया रख दिया। उसकी चूत अब ऊपर की तरफ उभर आई। स्पष्ट खुली और चुदवाने की दावत देती चूत को चोदने का निमंत्रण पाकर मैं एकदम मस्त हो चुका था। मैंने चूत मारने के लिए उसकी चूत में थूक दिया और अपने लंड पर थूक से अच्छे से मालिश की। थूक बेस्ट लुब्रिकेंट होती है।
धीरे से उसकी चूत की गुलाबी फांकें खोल कर छोटे छेद पर सुपाड़े को रख कर मैंने अपने होटों से उसके होंट भींच लिये और धक्का लगाना शुरु किया।
वो मुझे अपने से दूर ठेलने लगी। मैंने जरा सी जबरदस्ती से काम लेते हुए एक ही झटके में लंड को अंदर ठोक दिया। वो चिहुंक गई और जोर से मुझे पकड़ लिया। वो रो रही थी, आँखों में पहली चुदाई का दर्द और सील टूटने से बहता खून दोनों ही उसके लिए पहले तजुर्बे थे।
अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और वो ताल और लय से चुदाई में मेरा साथ दे रही थी। जम कर अपनी मौसेरी बहन सायरा की चूत का भोग करने के बाद मैंने उसे अपनी माशूका का दर्जा दे दिया। उसकी वो काली चोली आज भी मेरे पास सौगात के तौर पर रखी हुई है जिसे वो देकर गई थी। आज भी उसकी शादी हो गई पर उसकी वो चोली मुझे याद दिलाती है।
हजारों कहानियाँ हैं अन्तर्वासना  !

बुधवार, 12 जून 2013

उत्तम वंश वृद्धि के उपाय


________________________________________
सभी दम्पतियों की इच्छा होती है कि उसके बाद उसका पुत्र उसके वंश को आगे चला सके। इसलिए वे चाहते हैं कि उनके वंश को चलाने के लिए पुत्र का जन्म होना आवश्यक है। वैसे देखा जाए तो उत्तम वंश की परंपरा जो हमारे पुरखों द्वारा छोड़ी गई है, उसे चलाए रखने के लिए बड़े, बूढ़े, शादी-विवाह के अवसर पर कुल-गोत्र का मिलान करते हैं। वंश परम्परा तथा चलन को देखने के लिए खान-पान तथा आचार-विचार पर ध्यान दिया जा सकता है।
बहुत से विद्वानों का कहना है कि जिन स्त्री-पुरुषों में प्रेम अधिक होता है, उनके द्वारा उत्पन्न पुत्रों के गुण उनके स्वयं के गुणों से मिलते-जुलते हैं। शरीर की सुन्दरता और उसके अंदर के गुण जिस स्त्री तथा पुरुष में होते हैं, उनमें हमेशा ऐसे पुत्र को प्राप्त करने का लालच होता है जिसके अंदर ठीक उसकी छवि दिखाई दे और जिससे पीढ़ी दर पीढ़ी तक वही नस्ल चलती रहे।
हम आपको यह बताना चाहते हैं कि उत्तम संतान की प्राप्ति तभी हो सकती है जब तक पति-पत्नी में गहरा प्रेम, उमंग, आनन्द, वासना और उत्साह भरा हो। उत्तम संतान प्राप्त करने के लिए पति-पत्नी को उत्तम स्थिति में रहना जरूरी है। इसलिए कहा जा सकता है कि गर्भाधान के समय में दम्पत्ति की जो मनोवृत्ति होती है उसका गर्भ पर स्थिर प्रभाव पड़ता है।
शारीरिक और जातीय प्रवाह के कारण से उत्पन्न हुए मनुष्य का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जो परस्पर सिलसिला बना रहता है तो उसे ही वंश परम्परा के नाम से जाना जाता है।
मनुष्यों के शरीर में जो परमाणु होते हैं, वे अपने आकृति को दूसरे की तरह धारण करने की कोशिश करते हैं। वही बाद में पीढ़ी दर पीढ़ी बच्चों में उतरते हैं, जैसे- आंखों का रंग, त्वचा, बाल, वजन, कद, शारीरिक तथा मानसिक बल, बोलने की कला, गाने बजाने में विशेषता, देखने में अंतर, सुनने की शक्ति, पैतृक नशेबाजी, पैतृक रोग जैसे टी.बी. या मिर्गी तथा उपदंश आदि स्वाभाविक ही उनमें प्रकट हो जाया करते हैं। जिनके माता-पिता जिन-जिन रोगों से ग्रसित होते रहते हैं उसी प्रकार के रोग उनके बच्चों को भी होने का खतरा बना रहता है।
वैसे देखा जाए तो मनुष्य केवल अपने माता-पिता से ही उत्पन्न नहीं हुआ करता है बल्कि जिस बीज से बच्चे की उत्पत्ति होती है उसके पूर्वज, वंशधरों का अंश भी उसमें होता है, जैसे कई पुत्र में माता-पिता के चौथाई अंश गुण अवश्य ही रहते हैं जिससे उस संतान पर वही प्रभाव प्रकट हुआ दिखाई पड़ता है।
किसी भी पुत्र में उसके माता-पिता के अधिक से अधिक गुण पाए जाते हैं। लेकिन यह भी देखा गया है कि किसी पुत्र में माता के गुण अधिक पाए जाते हैं तो किसी में पिता के, किसी में एक के गुण अधिक दिखाई देते हैं तो किसी में एक का गुण दूसरे के गुणों से छिप जाता है।
यदि आप अपने संतान के गुणों में सुधार करना चाहते हैं तो आपको प्राकृतिक नियमों के ज्ञान का अनुसरण करना पड़ेगा। जिसके फलस्वरूप कई पीढ़ियों के अनन्तर तथा दोष नष्ट होकर अच्छे गुण का प्रभाव अपने पुत्र में पा सकते हैं। सबसे पहले दम्पतियों को यह सोच लेना चाहिए कि इस प्रकार के परिवर्तन करने से हमारे संतान को कष्टों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस तरह की परिस्थितियों को सोचकर ही बुद्धिमान पुरुष श्रेष्ठ कदम उठा सकते हैं। 
बहुत से वैज्ञानिकों का कहना है कि पुत्र के शरीर की रचना का आधा भाग माता-पिता के गुणों को मिलाकर पूर्ण होता है बाकी आधा पूर्व पुरुषों से या वंश परम्परा से आता है। कहने का अर्थ यह है कि बच्चे के शरीर का आकार, गुण तथा सुंदरता का आधा भाग तो माता पिता से मिलता है तथा बाकी का आधा अपने वंश के पहले के पुरुषों से मिलता-जुलता होता है।
कभी-कभी तो यह भी देखा गया है कि बच्चे में मातृक और पैतृक गुणों में से किसी एक का गुण खत्म सा हो जाता है। कभी तो संतान में माता का गुण पिता के गुणों की अपेक्षा अधिक हो जाता है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होता है कि पिता का गुण संतान में है ही नहीं।
कभी-कभी तो यह भी देखा गया है कि संतान में कुछ ऐसे गुणों का विकास हो जाता है जो न तो मातृक और न ही पैतृक होते हैं। इस स्थिति में कभी-कभी पुत्र में पिता के विलक्षण गुण पाए जाते हैं लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि यह उसके वंश में किसी पहले के पुरुष से कुछ गुण होते हैं। कुछ का तो यह भी कहना है कि इस प्रकार के विभिन्न गुण पीढ़ियों तक छिपे रहते हैं और किसी प्राकृतिक कारण से वे विकसित नहीं हो पाते।
कुछ आचार शास्त्रियों तथा मनु ने माता के अंशपिण्ड और पिता के अंगोत्र कुल में विवाह का नियम बनाया है तथा कुल गोत्र, शाखा व प्रवर आदि सात बातों का विभक्तिकरण है। विवाह में इन संबंध बातों को देख लेना चाहिए।
बहुत से विद्वानों ने यह कहा है कि जो स्त्री माता की 6 पीढ़ी और पिता के गोत्र की न हो वही विवाह के योग्य है।
दस कुल (परिवार) ऐसे होते हैं जिसमें विवाह नहीं करना चाहिए – 
1. जिस कुल में किसी को पेचिश का रोग हुआ हो उससे विवाह न करें।
2. जिस कुल में कोई टी.बी. (यक्ष्मा) के रोग से पीड़ित हो उससे शादी न करें।
3. जिस कुल में किसी को बवासीर हो गया हो उस कुल में विवाह न करें।
4. जिस कुल में किसी के शरीर पर बड़े-बड़े रोग हो उस कुल में विवाह करना उचित नहीं होता है।
5. जिस कुल में कोई विद्वान न हो उस कुल में विवाह करना ठीक नहीं है।
6. जिस कुल में कोई उत्तम पुरुष न हो उसमें शादी न करें।
7. जिस कुल में उत्तम क्रिया न हो उसमें शादी करना उचित नहीं होता है।
8. जिस कुल में किसी को गलित कुष्ठ हुआ हो अर्थात शरीर की त्वचा कट-कटकर गिर रही हो, उस कुल में शादी करना ठीक नहीं होता है।
9. जिस कुल में किसी को श्वेत कुष्ठ (सफेद दाग) हो उस कुल में शादी न करें।
10. जिस कुल में किसी को मिर्गी रोग हो, उस कुल में भी शादी करना अच्छा नहीं रहता है।
अपने से नीच जाति की कन्या से विवाह न करें- 
1. जिस लड़की की त्वचा पीले रंग की हो उससे विवाह न करें।
2. जिस लड़की की आंखे बिल्लौरी हो उससे शादी न करें।
3. अधिक बोलने वाली लड़की अर्थात बतूनी से शादी करना उचित नहीं होता है।
4. जिस लड़की के शरीर पर बड़े-बड़े बाल (रोयें) हो उससे शादी न करें।
5. जिस लड़की के शरीर पर बिल्कुल भी रोयें न हो उससे भी शादी न करें।
6. जिस लड़की के शरीर में अधिक अंग हो उससे शादी न करें। जैसे- छः अंगुली वाली लड़की।
7. रोहिणी, अद्रा, मघा, पूर्वा आदि नक्षत्र के नाम की लड़कियों से शादी न करें।
8. नदी के नाम पर जिस लड़की का नाम रखा गया हो उससे भी शादी न करें, जैसे- गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी आदि।
9. पर्वत के नाम वाली लड़की से भी शादी न करें। जैसे- विध्यांचल, मंदाकिनी आदि।
10. पक्षी के नाम वाली लड़की से शादी न करें जैसे- हंसनी, मैना, सुगनी, पटू आदि।
11. सांप के नाम वाली लड़की से शादी न करें जैसे- नागनी, उरंग, धामनी आदि। 
12. नीच नाम वाली लड़की से शादी न करें जैसे- दासी, छोटी आदि। 
13. भयानक नाम वाली लड़की के नाम से शादी न करें जैसे- कालिका, चंडिका, भवानी, सूर्पंनखा आदि। 
14. जिस लड़की के नाम के पीछे का शब्द मा हो उससे शादी नहीं करनी चाहिए जैसे- कालीमा, लालीमा, मनोरमा आदि।
कैसी कन्या से विवाह करें – 
1. जिस लड़की का नाम सुंदर हो उससे शादी करनी चाहिए जैसे- यशोदा, सौभाग्यवती, कंचन, पारो, कोमल, पारुल आदि।
2. हंस और हाथी के समान धीरे-धीरे चलने वाली लड़की से शादी करना अच्छा होता है।
3. जिस लड़की के रोम छोटे, केश बड़े तथा दांत छोटे हो उससे शादी करें। 
4. जो लड़की मीठी बोलती हो और मृदु अंग वाली हो उससे शादी करें।
5. जो पिता के गोत्र तथा माता की पीढ़ी में न हो उससे शादी करनी चाहिए।
वैसे देखा जाए तो संसार में केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी होता है जिसमें सोचने तथा विचार करने की शक्ति होती है। उसे छोटे से छोटे तथा बड़े से बड़े कार्यों को करने के लिए सोचना तथा विचार करना पड़ता है। इसलिए मनुष्यों को कोई भी कार्य करने के लिए सबसे पहले मन की शक्ति तथा दूसरे अंगों की शक्ति की आज्ञा के अनुसार ही कार्य करना पड़ता है। इस शक्ति की सहायाता के बिना कोई भी कार्य नहीं हो सकता है।
मनुष्य का विचार एक प्रकार के कंपन के समान होता है, यह ठीक उसी प्रकार से लगता है जिस प्रकार से तालाब में एक छोटा सा कंकड़ फेंक देने से उसमें एक लहर उत्पन्न होती है। उसी प्रकार विचार भी एक लहर के समान वातावरण में कंपन उत्पन्न कर देती है।
ईथर एक प्रकार का ऐसा तत्व होता है जो वायुमण्डल में एक सैकेंड में 50 कंपन उत्पन्न करने की शक्ति रखता है। इसके 415 हजार कंपन तक की संख्या को मनुष्य सुन सकता है। ईथर के परमाणु इतने सूक्ष्म हैं कि सोने जैसे धन द्रव्य के एक परमाणु में ईथर के लाखों परमाणु हैं। प्रत्येक विचार जो मस्तिष्क में उत्पन्न होते हैं वे ईथर पर प्रभाव डालते हैं। इस प्रकार ईथर पर हमारे विचार अंकित हो जाते हैं।
कुछ अध्ययनों से यह भी पता चला है कि आचार और स्वभाव इच्छा और आवश्यकता के अनुसार विकसित होना या लोप हो जाना मनुष्य की मन शक्ति पर निर्भर होता है जैसे- सिंह की विकराल मूर्ति उसके तेज स्वभाव के कारण और गाय की शांत मूर्ति उसके शांत जीवन के कारण है। क्या आपको पता है कि जो जानवर पालतू होते हैं उसमें और उसी जाति के जंगली जानवर के स्वभाव में अधिक अंतर देखने को मिलता है। पालतू जानवरों का स्वभाव शांत और जंगलियों का स्वभाव तेज हो जाता है। बहुत से रेंगने वाले जीवों ने सैकड़ों हजारों वर्षों तक पैरों की इच्छा उत्पन्न करके पैर पैदा कर लिए, इसी तरह से मछलियों ने पर उत्पन्न कर लिए। लता और फूलों में भी विचित्र रंग हो गए। यह मानसिक शक्ति का ही प्रभाव है। इस प्रकार की बातों से हमें यह पता चलता है कि मानसिक शक्ति बच्चे के विकास में कितनी सहायक है। उदाहरण के लिए श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के प्रेम का ही फल था कि श्रीकृष्ण का पुत्र श्रीकृष्ण के समान था। वे इस प्रकार कृष्ण से मिलते-जुलते थे कि उन्हें यह लगता था कि क्या यह मैं ही तो नहीं हूं। प्रद्युम्न का रूप ही नहीं गुण भी कृष्ण से मिलता था।
एक बार एक दम्पत्ति ने एक सुंदर बालक का चित्र खरीदा और जब गर्भवती हुई तो वह उस चित्र को रोज गौर से देखा करती थी और जब उसने एक बालक को जन्म दिया तो यह देखा कि उस चित्र वाले बालक से कुछ-कुछ शक्ल उसके बालक का मिलता-जुलता था।
हम एक घटना और भी बताना चाहते हैं कि एक बार एक स्त्री अपने बच्चे को अफीम खिलाकर कहीं चली गई थी लेकिन अफीम की मात्रा बढ़ जाने से उसके बच्चे की मृत्यु हो गई। इससे स्त्री को बहुत दुःख हुआ। उसी दशा में उसे फिर गर्भ ठहर गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि जो बच्चा पैदा हुआ वह रोगी और कमजोर था। उसे जन्म से ही मस्तिष्क विकार था, दो वर्ष रो

मंगलवार, 14 मई 2013

Bhabhi ne bathroom mai bulaya Bhabhi ne bathroom mai bulaya

Hi desi friends this is James I’m from Surat. Let me tell u that this site is mind blowing. Now to my story. Meri bhabhi aik sexy woman hai us ke baray baray mammein hain jin ka size 38d ,gand 38 aur waist32hai. Yeh sachi kahani hai.aik rat mein achanak utha aur bathroommein janay ke liye giya laikin wahan pehele hi light jal rahi thi mein ne bhabhi ke kapray pehchan liyay aur aik qadam peechay hat giya aur intezar karnaylag giya thodi dair bad bhabhi ke kapray pehinanay ki awaz sunaim dijab us ne kapray pehin liyay tu mein kanptay huaiy us ke nazdeek giya aur hath jor kar us se kaha ke mujhay apnay mammoon ko hath laganay do.tu us nay kaha nahein tumhara bhai jag raha hai aur abhi us ne mujhay choda haikahein woh na a jaiy lakin mein ne zid ki tu bhabhi ne kaha ke mein shoor macha doon gi mein dar giya magr ab neend kahan ane wali thi . Mein achay moukay ki talash mein tha. Aik din bhibhi mere kamray mein ayee tu mein ne munasib samjhtay huy us ko 500rupees diye. Us ne mujh se paisay le liye aur chali gayee. Usi din mein himat kar ke us kay kamray mein giya aur us ki almari mein se us ki angiya nikal kar us ke samnay usay choomnay lag giya.

Bhabhi ne kaha kiya kar rahay hokoi dekh le gamein ne kaha mein majboor hoon tum mujhay achi lagti ho bhabhi ne kaha yeh achi bat nahein , mein ne bhabhi ko kaha ke duniya mein hum akely nahein hain sabhi kartay hein dosto mein bhabhi ke qadmoon me par giya bhabhi ne kaha chalo uthoo theek hai laikin is bat ka pata kisi ko nahein chalna chahiy mein ne bha bhi ke mammon ko hath lagaya aur uth giya bhabhi ne kaha kal 12am mein jab bathroom mein nahanay jaon tu tum toilet mein a jana aur mein bathroom ka darwaza khula rakhon gi.d0s ray di theek 12am bhabhi bathroom mein ghus gayee aur mein thodi dair bad toilet mein chala giya mere dil ki dhadkan tez ho rahi thi.mein ne toilet ka darwaza band kiya aur bathroom mein ghus giya wahan mere jan bhabhi mera intezar kar rahi thi us ne darwza peechay se band kar diya .mein ne bhabhi ko ko peechay se pakar liya aur apna adha sakhat lun us ki gand se touch kiya bhabhi ne aik siskari lee aur mujh se se kaha mere mammoon ko pakroomein ne bhabhi ke mammon kopakarliya thodi dair bad bhabhi seedhi ho gayee aur mujh se kaha ke apna lun tu dikhaoo mein ne shalwar utar diaur bhabhi ko us ka muna dikhaya bhabhi ne us ko payar se chooma aur mujh se kaha ky amein is ko chooss sakti hoon mein ne kaha jasaiy tumhari marzi janoon.
Bhabhi ne mere lun ko moon me lay kar choosay lagana shrooh kar diay thodi dair bad jab farigh hone wala tha tu mein ne bhabhi ke moon mein say lun nikal kar us ke mammoon par choot giya bhabhi ne sari mani mammon par mal lee aur dobara chooosay laganay lagi thodi dair bad phir mera lora garam ho giya bhabhi ne kaha is ko meri phudi mein dal do mein ne kaha nahein bhabhi ye ghalat hai phudi mere bhai ka haq hai tu bhabhi ne kaha aur kya karo ge mein ne kaha mein tumhari gand mar sak ta hoon bhabhi ne kaha nahein mujhay dard ho ga mein ne kaha nahein bhabhi mein pehalay us par tail laga deta hoon phir bhabhi man gayee mein ne us ki gand par tail laga diya phir apnay loray par tail mal liya bhabhi ko ghoori banaya aur phir apnay lun ko us ki gand ke qareeb le giya bhabhi ne gand ko dono hathoon se pakr rakha tha mein ne lun bhabhi ki gand mein de diya aur us ke mamoon ko pkar kar zor zor se jhatkay marnay lag giya bhabhi ne kaha aur zor se phar dal meree gand ko uffffff tu ne tu mujhay mar dala aur andar kar aur mammoon ka dabao mein thodi dair tak bhabhi ko isi andaz mein chodta raha phir mein jab chootnay laga tu mein ne lun us ki gand mein se nikal kar us kay mouth mein day diya bhabhi ne sari mani pee lee is kay bad mein ne us ki phudi chatni shoorooh kar di aur us ko bhi farigh kar diya us kay bad mein ne us ko kiss kiya aur darawza khool kar wapas toilet chala giya. Dosto is kay bad tu meree qismat ka darwaza khul giya ab mein bhabhi ko jab ji karay chodta hoon aur mazay laita hoon
Enhanced by Zemanta

मंगलवार, 7 मई 2013

मेरा सब कुछ आप का है,mera sab kuch aap ka

नमस्कार मित्रो,

मैं हूँ विकास, उम्र 20 साल, 5'11", मैं औरंगाबाद, महाराष्ट्र का रहने वाला हूँ। लगभग 1 साल से "हिंदी सेक्सी कहानियां" पर कहानियाँ पढ़ रहा हूँ।

मैंने सारी कहानियाँ पढ़ी है और अब चाहता हूँ कि इस विशाल कथा संग्रह में मैं भी अपना योगदान दूँ !

यह कहानी एकदम सच्ची है और मेरी अपनी है जो मेरे साथ तब घटी जब मेरा लंड जवान हो रहा था। यह कहानी मेरे प्यार की कहानी है, उम्मीद करता हूँ कि आपको पसंद आएगी... आप अपनी राय मुझे मेल करके जरूर बताईयेगा...

अन्य लड़कों की तरह मैं भी अपने लंड को लेके काफी आकर्षित था, लंड का बार बार बड़ा होना, फिर उसका चिपचिपा होना मुझे बहुत पसंद आने लगा था इसलिए मैं अपना लंड हाथ में लेकर मजे लेता था।

ऐसे ही एक दिन मैं अपने बिस्तर पर लेटा अपने लंड को सहला रहा था, तब मुझे लगा कि कोई मुझे देख रहा है। लेकिन देखता कौन? घर में तो कोई नहीं था, सब लोग बाहर गए थे...

मुझे थोड़ा डर लगने लगा...मैंने अपने कपड़े ठीक किये और देखने के लिए उठा तो वहाँ कोई नहीं था...

हमारा घर काफी बड़ा है इसलिए मुझे खोजने में वक्त लग रहा था। जब मैं पीछे गार्डन की ओर गया तो मुझे घर की घण्टी बजने की आवाज आई। मैं देखने गया तो वहाँ प्रिया खड़ी थी।

प्रिया मेरी रिश्तेदार, एक सुन्दर अप्सरा, उम्र 18 साल, गोरी, लंबी, कद 5'9" स्तन ३४" और सबसे ज्यादा प्यारी उसकी कमर 24" चूतड़ 34" के... कुल मिला कर एकदम सुन्दर लड़की, नैन नक्श भी कातिलाना हैं।

जब मैंने उसको देखा तो मैं थोड़ा डर गया कि कहीं प्रिया ने तो नहीं देखा था मुझे?

वो मुझे देखकर थोड़ा शरमाई और घर के अंदर चली गई। मैं भी उसके पीछे पीछे चला गया। वो हॉल में सोफ़े पर बैठ गई। मैं थोड़ा डरा हुआ था।

तब उसने बात चालू की, उसने पूछा- सब लोग कहाँ हैं?

मैं- सब बाहर गए हैं...पड़ोस में शादी है।

"आप क्यों नहीं गए?"

मैं- यार, मुझे शादियों में जाना पसंद नहीं है, तुम्हें पता है ना...

"तो यहाँ पर क्या कर रहे थे?"

तब मुझे पता चल गया कि बेटा, तुझे इसने देख लिया है... मैंने सोचा कि अब तो तू गया...

मैं- मैं क्या?...कुछ भी तो नहीं...तुमने कुछ देखा क्या?

"हाँ...बहुत कुछ...!"

असल बात यह है कि प्रिया और मेरी शादी बचपन में ही तय हो गई थी और हम दोनों एक दूसरे को मन ही मन पसंद भी करते थे। लेकिन इस बारे में कभी बात कभी नहीं की थी।

मुझे डर लग रहा था कि वो क्या सोचेगी मेरे बारे में?

तब मैं बोला- प्लीज तुम बुरा मत मानो लेकिन मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था, इसलिए...सॉरी...

वो बोली- अरे नहीं, मैं नाराज नहीं हूँ कि तुम ऐसा कर रहे थे...बस थोड़ा बुरा लग रहा है।

मैं बोला- बुरा क्यों लग रहा है?

तब उसने बोला- मुझसे तुम्हारी यह तड़प देखी नहीं जा रही... मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ...कोई अपने प्यार को तड़पता देख सकता है क्या?

मेरा मुँह खुला का खुला रह गया...वो आकर मेरी गोद में बैठ गई और अपनी बाहों को एक हार की तरह मेरे गले में डाल दिया। मैंने भी उसको अपनी बाहों में लिया और हमारी प्रेम कहानी शुरू हो गई...

उसने अपने नर्म गुलाबी होंठ मेरे होंठों पर रख दिए, हम दोनों हमारे पहले चुम्बन का लुत्फ़ उठा रहे थे, मैं तो जैसे जन्नत मैं था। वो भी बहुत उत्तेजित लग रही थी... वो पूरे मजे लेकर मुझे चूम रही थी... लेकिन यह मजा हम ज्यादा देर नहीं उठा पाए... घर के सभी लोग वापिस आ गये थे और हम प्यासे रह गए...

वो मेरी मम्मी की लाडली है, उसको देख कर मम्मी खुश हो गई...

रात होने वाली थी तो मम्मी ने उसको घर पर ही रोक लिया। हम दोनों तो जैसे खुशी से पागल हो गये... हमने साथ में खाना खाया और सोने के लिए मैं अपने कमरे में जा रहा था तभी मुझे मम्मी ने आवाज लगाई और कहा- आज प्रिया को तेरे कमरे में सोने दे और तू हॉल में सो जा...

तब मैंने अपना बिस्तर हॉल में लगाया और मैं सो गया या यह कहो कि सोने का नाटक कर रहा था...

अब मैं कुछ होने का इंतज़ार कर रहा था... लेकिन बहुत देर हो गई थी और प्रिया ने अपना यानि मेरे कमरे का दरवाजा भी नहीं खोला था... इंतज़ार करते करते मैं 11 बजे सो गया क्योंकि मुझे रोज जल्दी सोने की आदत थी...

लगभग दो घंटे बाद मैंने अपने पास किसी को लेटा हुआ महसूस किया... रात का समय था और ऐ.सी भी चालू था तो मुझे काफी ठण्ड लग रही थी...

मैंने अपनी करवट बदली तो देखा कि प्रिया पास लेटी है, उसकी पीठ मेरी तरफ थी। मैंने A.C. बंद करने के लिए रिमोट उठाया।

तभी उसने अपनी करवट बदली और बोली -रहने दो ना प्लीज, मुझे ठण्ड में सोना बहुत पसंद है।

इतना कहकर उसने अपनी करवट बदली या यूँ कहो कि ठण्ड के मौसम ने करवट बदली और उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। वो जानती तो थी कि मैं बहुत शर्मीला हूँ इसलिए पहल उसको ही करनी पड़ेगी...

फिर हम दोनो एक साथ एक बिस्तर में एक कम्बल में लेटकर एक दूसरे के साथ मस्ती करने लगे... वो मुझे चूम रही थी और मेरे होठों को काट भी रही थी...

मैं भी पीछे नहीं रहा, मैं उसका पूरा साथ दे रहा था... उसकी बाहों मे मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा था। हम दोनों अब अपने रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहते थे...

उसने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने स्तन पर रख दिया...

फिर क्या था, मैं तो बस सातवें आसमान में उड़ने लगा, मेरी सारी शर्म खुल गई... मैं उसके स्तन धीरे धीरे दबाने लगा... वो सिसकारियाँ ले रही थी, उसको बहुत मजा आ रहा था। फिर मैंने उसका टॉप उसके बदन से अलग कर दिया, वो और ज्यादा रोमांटिक हो गई और उसने भी मेरा टी-शर्ट निकाल दिया और हम आलिंगनबद्ध हो गये...एक दूसरे को सहलाना फिर मेरा उसके स्तन को काटना,

दबाना और निप्पल्स को छेड़ना उसे बहुत रोमांचित कर रहा था।

फिर मैंने उसकी जीन्स भी निकाल दी, ऐसा लग रहा था कि वो पूरी तैयारी के साथ आई थी क्योंकि उसने ना तो ब्रा पहनी थी और ना ही... आप तो समझ ही गये होंगे...

मुझे काफी आसानी हुई उसकी योनि तक जाने में... उसकी योनि काफी गीली हो गई थी। मैंने उसकी योनि में अपनी एक उंगली से गुदगुदी की... वो थोड़ा मचल उठी, उसकी योनि बिल्कुल कुंवारी थी... जो उसने मुझे पेश कर दी उस रात खेलने के लिए।

वो बोली- विकास, मेरा सब कुछ सिर्फ आप का है... आप जो चाहे कर सकते हैं...

मैं बोला- ठीक है लेकिन एक शर्त पर...

वो बोली- कैसी शर्त..?

मैं बोला- तुम मुझे विकास नहीं, जानू बोलो और आप नहीं तुम कह कर बुलाओ...

वो बहुत खुश हो गई और बोली- ठीक है मेरे जानू...तुम बहुत अच्छे हो, आई लव यू।

फिर मैं बोला- अच्छी तो तुम हो...मेरा भी सब कुछ तुम्हारा है... आई लव यू टू !

फिर मैंने भी अपने बाकी के सारे कपड़े उतार दिए...मेरा लिंग उसकी योनि को स्पर्श रहा था...

उसने मेरा लिंग अपने कोमल हाथों में लिया और बोली- इसने आपको बहुत तड़पाया है ना.. अब नहीं तड़पायेगा कभी...

और वो उसको सहलाने लगी... वो मुझे बहुत अच्छे से समझती थी, उसने अब मेरे लिंग को थोड़ा दबाना और आगे पीछे करना चालू किया...

मुझे बहुत मजा आ रहा था...मैं भी उसके स्तन दबा रहा था और दूसरे हाथ से उसकी योनि को गुदगुदा रहा था... वो बीच बीच में तब सिसकारियाँ लेती जब मैं उसकी योनि को छेद देता या जब उसके निप्पल काट देता...

अब थोड़ा और आगे बढ़ने का समय था... मैंने उसकी योनि को नीचे जाकर चूम लिया... उसकी योनि को अपने होठों से दबा रहा था...

और वो मचल रही थी... मेरे बालों में हाथ फेर रही थी...

फिर मैंने उसकी भगनासा पर अपने होंठ रख दिए... वो काफी उत्तेजित हो गई थी...उसकी योनि लगातार चिपचिपी होती जा रही थी... फिर मैं ऊपर आया.... हम दोनों फिर से आलिंगनबद्ध हुए...

फिर वो मुझे चूमते चूमते नीचे गई... आखिर में उसने मेरे लिंग को चूम लिया और उसको अपने मुख में ले लिया...

अपने सर को वो आगे-पीछे करने लगी, मुझे बहुत मजा आ रहा था... उसने मेरा पूरा लिंग अपने मुख-रस से गीला कर दिया...

अब वो एक होना चाहती थी... उसकी तड़प साफ़ झलक रही थी... उसने अपने नीचे एक स्कार्फ बिछा लिया जो वो पहनकर आई थी...

मैं समझ गया कि ऐसा क्यों किया उसने...

फिर वो लेट गई और मैं उसकी टांगों के बीच आ गया... मेरा लिंग और उसकी योनि दोनों ही बहुत गीले थे... मैंने अपना लिंग उसकी योनिद्वार पर रखा और थोड़ा जोर लगाया...

लिंग थोड़ा अंदर तो चला गया लेकिन प्रिया दर्द से तड़प उठी...

परन्तु वो बोली- रुकना मत जानू ! आपको मेरी कसम है... मैं दर्द सह लूंगी...

तो मैंने दो मिनट रुक कर और थोड़ा जोर लगाया इस वक्त मुझे अपने लिंग के पास काफी गर्माहट महसूस हुई....इसका मतलब था कि उसका कौमार्य-पट टूट गया था... उसने अपने नाखून मेरी पीठ पर गड़ा दिए... मैं थोड़ा रुक गया उसके सामान्य होने की इंतजार करने लगा...

फिर वो बोली- जानू, मुझे अब दर्द नहीं ही रहा आप थोड़ा और डाल दो अंदर...

मैंने भी जोश में आकर एक और धक्का लगा दिया... अब मेरा पूरा का पूरा लिंग उसके अंदर था और उसके आँसू निकल रहे थे...

मैंने अपने होंठ उसकी आँखों पर रखे और उसके आँसू पी गया...फिर हमने एक लंबा चुम्बन किया..और उसकी कमर चलने लगी...

हम इस ठण्ड के मौसम में गर्मी का एहसास कर रहे थे।

मैं अपने लिंग को उसकी योनि में अंदर-बाहर कर रहा था... अब हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था... मेरी स्पीड धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी... साथ ही साथ मैं उसको चूम भी लेता और उसके स्तन तो मैंने १ मिनट के लिए भी नहीं छोड़े थे...

फिर वो मेरे ऊपर आ गई और मुझे मजा देने लगी... वो पूरी तरह से मिलन में खो चुकी थी... वो अपने बालों को पकड़ काफी सेक्सी मुद्राएँ बना रही थी जिससे मैं बहुत उत्तेजित हो रहा था... आखिर में वो मेरे ऊपर लेट गई और एक लय बद्ध तरीके से अपने कूल्हे चलाने लगी, थोड़ी देर में ही उसने स्पीड बढ़ा दी तो मैं समझ गया था कि वो झड़ चुकी है...

तब मैंने उसको अपने नीचे लिया और प्यार से सम्भोग करता रहा क्योंकि वो थक गई थी इसलिए मैंने धक्के थोड़े धीमे कर दिए...

जब मुझे लगा कि मैं छुटने वाला हूँ तब मैंने धक्के बढ़ा दिए...

वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी और आखिर में वो पल आ ही गया... मैंने अपना वीर्य उसकी योनि में ही निकाल दिया और उसके ऊपर ही लेट गया...

हम दोनों सुस्त हो गये थे क्योंकि यह हम दोनों का पहला सेक्स था...

वो मुझे बहुत प्यार कर रही थी... अपने सीने से लगा कर बालों में हाथ फेर रही थी... मैं भी उसको सहला रहा था... फिर हम दोनों उठे और समय देखा तो साढ़े चार बज रहे थे। हमने करीब दो घंटे प्रणय-मिलन किया था...

हम दोनों फिर बाथरूम चले गए जो मेरे कमरे से जुड़ा था.. वहाँ उसने मुझे वो स्कार्फ और मेरा लिंग दिखाया जो उसके योनि रक्त से पूरा लाल हो चुका था...

मैंने बोला- यह स्कार्फ धो डालो !

लेकिन उसने मना कर दिया, कहा- नहीं, यह हमारे प्यार की निशानी है, मैं इसे मरते दम तक संभाल कर रखूंगी...

यह सुन कर मैं भी बहुत भावुक हो गया... हम दोनों ने फिर से एक दूसरे को आलिंगन किया और खुद को साफ़ करके मैंने उसे अपने कमरे में सुला दिया..

मैं उसके चेहरे पर एक संतुष्टिभाव दिख रहा था... जैसे उसको सब कुछ मिल गया हो...

फिर वो मेरी बाहों में समा गई... कुछ देर बाद मैं उठ कर अपनी जगह पर चला गया।

वो सुबह मुझसे मिली, वो आज भी बहुत खुश थी.. जाते जाते उसने मुझे कहा- जानू, आपने मुझे बहुत बड़ी खुशी दी है...एक वादा करो.. कि आप हमेशा मेरे साथ रहोगे... मैं आपको बहुत प्यार करती हूँ...

मैंने भी वादा किया और उसे खुशी से विदा किया... उसका भाई उसको लेने आया था... मेरा साला पता नहीं साला क्यों आ गया...

मैं जाना चाहता था उसको घर छोड़ने....

खैर जो भी हुआ अच्छा हुआ... मैं भी बहुत खुश था के मुझे भी कोई मिल गया समझने वाला...

उस दिन के बाद हम लोग हमेशा मिलते रहे घर पर बाहर, कभी उसके घर...

हमारी कहानी ऐसे ही आगे बढ़ रही थी कभी अचानक एक हादसा सा हुआ मेरी जिंदगी में...

मेरी पूरी जिंदगी बदल गई... प्रिया तो हमेशा साथ रहेगी... वो मुझे बहुत चाहती है... लेकिन जो हुआ वो भी काफी रोमांचक था...

अगर आप सभी पाठकों को मेरी यह कहानी पसंद आई तो उस किस्से के बारे में मैं अपनी अगली कहानी मैं लिखूंगा...

मुझे आप आपकी राय जरूर बताइएगा...

0.vikas.7@gmail.com

गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

चूत की सफाई और चुदाई

मेरा नाम मेहराना है। अभी मेरी उम्र 24 साल की है। अभी तक अविवाहित हूँ लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मेरी चूत भी कुंवारी है। यह तो बहुत पहले ही चुद चुकी।

तब मैं पढ़ती थी। उस दिन घर में मेरी अम्मा भी नहीं थी। मैं और मेरा भाई जो मुझसे 5 साल छोटा था घर पर अकेले थे। उस दिन स्कूल की छुट्टी थी। इसलिए मैं घर के काम कर रही थी। मेरा छोटा भाई पड़ोस में खेलने चला गया था। मैं बाथरूम में नहाने चली गई। अपने सारे कपड़े मैंने हॉल में ही छोड़ दिए और नंगी ही बाथरूम में चली गई, क्योंकि घर में तो कोई था नहीं इसलिए किसी के देखने का कोई भय भी नहीं था।

बाथरूम में आराम से मैं अपनी चूत को सहलाने लगी, सहलाते सहलाते अपने चूत में उंगली डाल ली। पूरी उंगली अन्दर चली गई। बड़ा ही मज़ा आया। अन्दर चूत में उंगली का स्पर्श साफ़ महसूस हो रहा था। मैं अपनी उंगली को चूत में घुमाने लगी।

मुझे लगा कि शायद चूत में अभी भी बहुत जगह इसमें खाली है, मैंने बाथरूम में रखा हुआ पुराना टूथब्रुश लिया और उलटे सिरे से पकड़ कर अपनी बुर में डाल लिया। मैं नीचे जमीन पर बैठ गई और अपनी दोनों टांगों को पूरी तरह फैला दिया। इससे मुझे अपने बुर में ब्रश डालने में काफी आसानी हुई। अब मुझे बहुत ही मज़ा आने लगा। इतना मज़ा आ रहा था कि पेशाब निकलने लगा। करीब आधे घंटे तक मैंने अपने चूत में कभी शेम्पू तो कभी नारियल तेल डाल डाल कर मज़ा लेती रही। और ब्रश से चूत की सफाई भी करती रही। थोड़ी देर के बाद मैं नहा कर वापस अपने कमरे में आ गई।

कुछ देर के बाद मेरा छोटा भाई भी बाहर से आ गया।

उसी शाम में मेरी अम्मा के दूर के रिश्ते में भाई लगने वाले एक रिश्तेदार मेरे यहाँ आ धमका। उसकी उम्र रही होगी कोई 20-21 साल की। उनको मेरी अम्मा से कुछ काम था। लेकिन अम्मा तो अगले दिन शाम में आने वाली थी। मैंने अम्मा को फोन करके उसके बारे में बताया तो अम्मा बोली- आज रात को उसे अपने घर में ही रुकने के लिए बाहरी कमरा दे देना।

रात को खाना पीना खाकर सभी चुपचाप सो गए। रात 11 बजे मुझे पेशाब लग गया। मैं बाथरूम गई तो मुझे फिर से वही सुबह में चूत में ब्रश डालने वाली घटना याद आ गई। मुझे फिर से अपनी बुर में ब्रश डालने का मन करने लगा।

मैंने अपने सारे कपड़े खोल कर अपने बुर में ब्रश डाल कर मज़े लेने लगी।

मुझे अपने बाथरूम का दरवाजा बंद करने का भी याद नहीं रहा। मैं दीवार की तरफ मुँह करके अपनी चूत में ब्रुश डाल कर मज़े ले रही थी।

तभी पीछे से आवाज आई- यह क्या कर रही हो मेहराना?

यह सुन कर मैं चौंक गई। मैंने पलट कर देखा तो मेरा मामू मसूद ठीक मेरे पीछे खड़ा था। वो सिर्फ एक तौलिया पहने हुए था।

मैंने कहा- आप यहाँ क्या कर रहे हैं मामू जान?

वो बोला- मुझे पिशाब लगा था इसलिए मैं यहाँ आया था तो देखा कि तुम कुछ कर रही हो।

मैं अब क्या कहूँ, क्या नहीं, हड़बड़ी में मैंने कह दिया- देखते नहीं, ये साफ़ कर रही हूँ। इसकी सफाई भी तो जरूरी है न? वैसे तुम यहाँ पिशाब करने आये हो ना तो करो और जाओ।

उसने कहा- मैं तो यहाँ पिशाब करने आया था।

मैंने कहा- ठीक है, तुम तब तक पिशाब करो, मैं अपना काम कर रही हूँ।

दरअसल मैं उसकी लंड देखना चाहती थी। सोच रही थी कि जब इसने मेरा चूत देख ली है तो मैं भी इसके लंड को देख कर हिसाब बराबर कर लूँ।

मसूद- तुम यहीं रहोगी?

मैंने कहा- हाँ। तुम्हें इस से क्या? ये मेरा घर है, मैं कहीं भी रहूँ।

उसने कहा- ठीक है।

और उसने अपना तौलिया खोल दिया और पूरी तरह से नंगा हो गया। मुझे सिर्फ उसकी लंड देखना था। उसका लंड मेरे अनुमान से कहीं बड़ा और मोटा था। उसकी लंड किसी मोटे सांप की तरह झूल रहा था। वो मेरे सामने ही कमोड पर बैठ गया। उसने अपने लंड को पकड़ा और उससे पेशाब करने लगा। यह देख मैं बहुत आश्चर्यचकित थी कि इतने मोटे लंड से कितना पिशाब निकलता है? पिशाब करने के बाद उसने अपने लंड को झाड़ा और सहलाने लगा।

उसने कहा- तुम अपनी चूत की सफाई ब्रश से करती हो?

मैंने कहा- हाँ !

उसने कहा- क्या तुम अपनी चूत के बाल भी साफ़ करती हो?

मैंने कहा- चूत के बाल? मेरे चूत में बाल तो नहीं हैं।

उसने कहा- चूत के अन्दर नहीं चूत के ऊपर बाल होते हैं, जैसे मेरे लंड के ऊपर बाल है ना उसी तरह।

कह कर वो अपने लंड के बालों को खींचने लगा।

मैंने पूछा- तुम्हारे लंड पर ये बाल कैसे हो गए हैं?

वो बोला- जब तुम बड़ी हो जाओगी तो तुम्हारे चूत पर भी बाल हो जायेंगे।

मैंने कहा- तुम्हारा लंड तो इतना बड़ा है कि लटक रहा है। क्या मेरा बुर भी बड़ा होने पर इतना ही बड़ा और लटकने लगेगा?

वो हंस के बोला- अरे नहीं पगली, भला बुर भी कहीं लटकता है? हाँ वो कुछ बड़ा हो जायेगा।

फिर बोला- तुम एक जादू देखोगी? अगर तुम मेरे इस लंड को छुओगी तो यह कैसे और भी बड़ा और खड़ा हो जाएगा।

मुझे बहुत ही आश्चर्य हुआ।

मैंने कहा- ठीक है, दिखाओ जादू !

वो कमोड पर से उठ गया और मेरे पास आ गया, उसने अपने लंड को अपने हाथों से पकड़ कर कहा- अब इसको छुओ।

मैंने उसके लंड को पकड़ लिया। ऐसा लग रहा था कि कोई गरम सांप पकड़ लिया हो।

उसने मेरे हाथ को अपने हाथ से दबाया और अपने लंड को घिसवाने लगा। थोड़ी ही देर में मैंने देखा कि उसकी लंड सांप से किसी लकड़ी के टुकड़े जैसा बड़ा हो गया, एकदम कड़ा और बड़ा। उसे बड़ा ही आनन्द आ रहा था। उसने अचानक मेरा हाथ छोड़ दिया। लेकिन मैं उसके लंड को घसती ही रही। थोड़ी देर में देखा उसके लंड से चिपचिपा सा पानी निकल रहा था जो शेम्पू की तरह था, वो कराहने लगा।

मैंने कहा- ये क्या है?

वो बोला- हाय मेहराना, ये लंड का पानी है। बड़ा ही मज़ा आता है। तू भी अपने चूत से ऐसा ही पानी निकालेगी तो तुझे भी बड़ा मज़ा आयेगा।

मैंने कहा- लेकिन कैसे?

वो बोला- आ इधर मैं तुझे बता देता हूँ।

मैंने कहा- ठीक है, बता दो।

उसने मुझे कमोड पर बैठा दिया और मेरी दोनों टांगों को फैला दिया। वो मेरी बुर को अपने मुँह से चूसने लगा। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। उसने मेरी बुर में अपनी जीभ डाल दी। मेरे से रहा नहीं गया और मेरी बुर से पिशाब निकलने लगा। लेकिन वो हटा नहीं और पेशाब पीने लगा। मैं तो एकदम पागल सी हो गई। वो मेरी निप्पल को ऐसे मसल रहा था लगा मानो वो मेरी चूची मसल रहा है। पेशाब हो जाने के बाद भी वो मेरी बुर को चूसता रहा।

फिर अचानक बोला- आ नीचे लेट जा।

मैंने कहा- क्यों मामू?

वो बोला- अरे आ ना ! तुझे और मस्ती करना बताता हूँ।

मैं चुपचाप बाथरूम के फर्श पर लेट गई। उसने मेरे दोनों पैरों को उठा कर अपने कंधे पर रख दिया और मेरी बुर में उंगली डाल कर घुमाने लगा। मुझे मज़ा आ रहा था।

वो बोला- अरे, तेरी बुर तो बहुत बड़ी है। इसे ब्रश से थोड़े ही साफ़ किया जाता है, आ इसकी मैं सफाई अपने लंड से कर देता हूँ।

मैंने कहा- अच्छा मामू, लेकिन ठीक से करना।

मामू ने कहा- हाँ मेहराना, देखना कैसी सफाई करता हूँ।

उसने बगल से नारियल तेल लिया और मेरे चूत के अन्दर उड़ेल कर उंगली डाल कर मेरी चूत की मुठ मारने लगा।

मस्ती के मारे मेरी तो आँखें बंद थी। उसने पहले एक उंगली डाली, फिर दो और फिर तीन उंगली डाल कर मेरी चूत को चौड़ा कर दिया। थोड़ी ही देर में उसने मेरी चूत के छेद पर अपना लंड रखा और अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा।

मुझे हल्का सा दर्द हुआ तो मैं कराह उठी।

वो रुक गया और बोला- क्या हुआ मेहराना?

मैंने कहा- तेरा लंड बहुत बड़ा है। यह मेरी बुर में नहीं घुसेगा।

वो बोला- रुक जा मेहराना। तू घबरा मत। बस मेरे लंड को देखती रह।

हालांकि मेरी हिम्मत नहीं थी कि इतने मोटे लंड को अपनी बुर में घुसवा लूं लेकिन मैं भी मज़े लेना चाहती थी। इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा।

अब उसने मेरी बुर के छेद पर अपना लंड रखा और धीरे धीरे रुक रुक कर अपने लंड को मेरी बुर में घुसाने लगा। मुझे थोड़ा दर्द तो हो रहा था लेकिन तेल की वजह से ज्यादा दर्द नहीं हुआ। उसने पूरा लंड मेरी बुर में डाल दिया। मुझे बहुत आश्चर्य हो रहा था कि इतना मोटा और बड़ा लंड मेरी छोटी सी बुर में कैसे चला गया।

वो मेरी बुर में अपना लंड डाल कर थोड़ी देर रुका रहा, फिर बोला- दर्द तो नहीं कर रहा ना?

मैंने कहा- थोड़ा थोड़ा !

फिर उसने थोड़ा सा लंड बाहर निकाला और फिर धीरे से अन्दर कर दिया। मुझे मज़ा आने लगा। वो धीरे धीरे यही प्रक्रिया कई बार करता रहा। अब मुझे दर्द नहीं कर रहा था। थोड़ी देर के बाद वो अचानक मेरी बुर को जोर जोर से धक्के मारने लगा।

मैंने पूछा- ये क्या कर रहे हो?

वो बोले- तेरी बुर की सफाई कर रहा हूँ।

मुझे आश्चर्य हुआ- अच्छा ! तो इसको सफाई कहते हैं?

वो बोला- हाँ मेरी जान। यह चूत की सफाई भी है और चुदाई भी।

मैंने कहा- तो क्या तुम मुझे चोद रहे हो?

वो बोला- हाँ, कैसा लग रहा है?

मैंने कहा- अच्छा लग रहा है।

वो बोला- पहले किसी को चुदवाते हुए देखा है?

मैंने कहा- देखा तो नहीं है लेकिन अपनी सीनियर लड़कियों के बारे में सुना है कि वो अपने दोस्तों से चुदवाती हैं। तभी से मेरा मन भी कर रहा था कि मैं भी चुदवा लूं। लेकिन मुझे पता ही नहीं था कि कैसे चुदवाऊँ?

वो बोला- अब पता चल गया ना?

मैंने कहा- हाँ मामू।

थोड़ी देर में उसने मुझे कस के अपनी बाहों में पकड़ लिया और अपनी आँखें बंद कर के कराहने लगा। मुझे अपने चूत में गरम गरम सा कुछ महसूस हो रहा था।

मैंने पूछा- क्या हुआ मामू? मेरे चूत में गरम सा क्या निकाला आपने?

वो बोला- कुछ नहीं मेरी जान । वो मेरे लंड से माल निकल गया है।

थोड़ी देर में उसने मेरे चूत से से अपना लंड निकाला और खड़ा हो गया। मैंने अपने चूत की तरफ देखा कि इससे खून निकल रहा था।मैं काफी डर गई और मामू को बोली- मामू, ये खून जैसा क्या निकल गया मेरे चूत से?

हालांकि वो जानता था कि मेरी चूत की झिल्ली फट गई है लेकिन उसने झूठ का कहा- अरे कुछ नहीं। ये तो मेरा माल है। जब पहली बार कोई लड़की चुदवाती है तो उसके चूत में माल जा कर लाल हो जाता है। आ इसे साफ़ कर देता हूँ।

मैं थोड़ा निश्चिंत हो गई।

फिर हम दोनों ने एक साथ स्नान किया। उसने मुझे अच्छी तरह से पूरा नहला-धुला कर सब साफ़ कर दिया और फिर हम दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर अपने अपने कमरे में चले गए।

सुबह जब मेरा छोटा भाई स्कूल चला गया तो मैं उसे चाय देने गई।

उसने मुझसे कहा- कैसी हो मेहराना?

मैंने कहा- ठीक ही हूँ।

उसने कहा- तेरी चूत में दर्द तो नही है ना?

मैंने कहा- दर्द तो है लेकिन हल्का हल्का। कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना मामू?

मामू ने कहा- अरे नहीं पगली। पहली बार तूने अपने चूत में लंड लिया था न इसलिए ऐसा लग रहा है। और देख, किसी को कल रात के बारे में मत बताना। नहीं तो तुझे सब गन्दी लड़की कहेंगे।

मैंने कहा- ठीक है, लेकिन एक शर्त है।

वो बोला- क्या?

मैंने कहा- एक बार फिर से मेरी बुर की सफाई करो लेकिन इस बार बाथरूम में नहीं बल्कि इसी कमरे में।

वो बोला- ठीक है आ जा।

और मैंने उसके कमरे का दरवाजा लगा कर फिर से अपनी चूत चुदवाई। वो भी दो बार ! वो भी बिल्कुल फ्री में।

दोपहर में अम्मा आ गई। अम्मा के आने के बाद भी वो मेरे यहाँ अगले पांच दिन जमा रहा। इस पांच दिन में मैंने आठ बार अपनी चूत उससे साफ़ करवाई।

इसके बाद न जाने कितने मर्दों के लंड को अपने चूत और गांड में डाल चुकी हूँ मुझे अब याद भी नहीं।

mehrana4lund@gmail.com
sexygirl4uonly16@gmail.com

शुक्रवार, 8 मार्च 2013

रंग दिखाने लगी ससुराल जाते

शादी करके मैं ससुराल आई, पहली रात मुझे डर था कि मेरी चोरी न पकड़ी जाए क्यूंकि शादी से पहले ही में कई लड़कों के साथ रंगरलियाँ मना चुकी हूँ, मैंने बहुत फ़ुद्दी मरवाई थी।पहली रात तो बच गई रस्मों के चलते पंजाब में अभी गाँव में भी और शहरों में भी पहली रात लड़की अपने साथ मायके से भाई को लाती है या बहन को।दूसरी रात को मुझे कमरे में बिठा दिया गया था घूंघट में। मैं उनका इंतज़ार कर रही थी, वो आये मेरी धड़कन बढ़ने लगी, दरवाज़ा बंद किया और मेरे करीब आये, उन्होंने दारु पी रखी थी, काफी पी हुई थी। मेरी चुनरी उतार कर ये मुझे पकड़ कर चूमने लगे, बोले- वाह ! कितनी खूबसरत हो !वो नशे में थे, मेरी भाभी जो कि मेरी हमराज़ थी, ने मुझे कहा था कि जब वो लौड़ा घुसाने लगें तो तू सासें खींच लेना और जांघें कस कर दर्द की एक्टिंग करना ! इन्होंने मुझे ऊपर से नंगी कर लिया और मेरा दूध पीने लगे- हाय ! क्या मस्त मम्मे हैं तेरे !मेरे निप्पल को काट दिया, मैं बहकने लगी, दिल करने लगा उनका लौड़ा पकड़ कर सहलाऊँ, चूसूँ !लेकिन खुद को शरीफ दर्शाना था, अपनी वासना अपने दिल में दबा ली।ये मेरे ऊपर चढ़ गए, मेरे होंठ चूसते हुए नीचे से मेरी सलवार का नाड़ा खिसका दिया खुद के कपड़े नहीं उतार रहे थे। सलवार उतार, पैंटी खिसका मेरी फ़ुद्दी को चाटने लगे।मैं कसमसाने लगी, मैंने हाथ ले जाकर इनका लौड़ा पकड़ लिया। वो अभी भी पूरा खड़ा नहीं था, मुझे तो देख कर ही लड़कों के कपड़ों में खड़े हो जाते थे, फिर इन्होंने तो मुझे नंगी किया था।फिर भी मैंने इनका पजामा खोल दिया और लौड़े को पकड़ कर देख मेरे सपने टूटने लगे, इतना छोटा लौड़ा ! पतला सा !मेरे अंदर क्रोध से भरी आग लग गई लेकिन इन्होंने मेरी फ़ुद्दी को चाटना ज़ारी रखा मुझे उसी से शांत करने का इरादा था।अतिम पलों में अपना छोटा सा लौड़ा घुसा झटके दिए, मैंने सांसें भी खींची, जांघें भी कस ली फिर भी इनका आसानी से घुसने लगा था दो मिनट में अपना पानी निकाल हांफने लगे, बिना कोई ज्यादा बात किये सो गए।पहली रात मेरी चोरी नहीं पकड़ी गई लेकिन दिल भी टूट गया।सुबह एक रस्म थी, मेरे सामने बैठे थे मेरे ननदोई जी। हट्टे-कट्टे थे, चौड़ा सीना, घने बाल, मरदाना मूछें !मेरी नज़र उनसे टकरा गई, वो पहले दिन से मुझे बहुत प्यासी नज़रों से देखते थे लेकिन नई नई शादी का लिहाज कर मैंने उनको शह नहीं दी थी। लेकिन सुहागरात के बाद आज मैंने भी अपनी आँखों में सूनापन दिखा दिया।हमारी शादी के तीन दिन बाद ही मेरी सबसे छोटी ननद की भी शादी रखी थी, मेरी तो शादी नई हुई थी, मेहँदी वगैरा पहले लगी थी, ना मुझे पार्लर की ज़रुरत थी।दोपहर को ही दारू का दौर चला बैठे ननदोई जी !सासू माँ ननद को लेकर बाज़ार चली गई थी, बाकी सभी घर के मर्द बहन की शादी का इंतजाम कर रहे थे, घर में आखिरी शादी थी, कसर कोई छोड़ना नहीं चाहता था, पति देव अपनी बहनों- भाभियों को लेकर शहर मार्केट ले गए मेहँदी लगवाने, ससुर जी के साथ बैठ ननदोई सा पैग-शैग का लुत्फ़ उठाते रहे, मैं उठकर अपने कमरे की तरफ चल दी।मुझे उम्मीद थी कि ननदोई जी सुबह मेरी आँखों में जो प्रश्न थे, उनका उत्तर जानने वो आयेंगे ही।मैंने चुनरी उतार बिस्तर पर डाल दी और बाथरूम में चली गई।मेरा कमीज़ काफी गहरे गले का था जिससे मेरी चूचियों का चीर बेहद आकर्षक दिख रहा था, जिसमें काला मंगलसूत्र खेल रहा था।मुझे यह उम्मीद थी कि शायद ननदोई जी आयें !मेरी कमीज़ छाती से काफी कसी हुई रहती है क्यूंकि मुझे अपने मम्मे दिखाने का शुरु से शौक था।जब बाथरूम से निकली थी तो सामने ननदोई जी को देख में इतना हैरान नहीं थी, फिर भी शर्माने का नाटक किया- आप यहाँ?अपनी चुनरी पकड़ने लगी।मेरे से पहले उन्होंने पकड़ ली, बोले- इसके बिना ज्यादा खूबसूरत दिखती हो !मेरे गाल लाल होने लगे- प्लीज़ दे दो ना !”क्या हुआ? नई भाभी, सुबह तो आपकी नज़रों में कुछ था? लगता है कि हमारे साले साब पसंद नहीं आये या फिर वो कुछ??” कहते कहते रुक गए, मेरे करीब आये बोले- लाओ मैं अपने हाथों से चुनरी औढ़ा देता हूँ।”वो मेरे बेहद करीब थे, चुनरी तो दे दी, उसको गले से लगा दिया ताकि मेरी छाती के दीदार उनको होते रहें।”मंगलसूत्र कितना प्यारा लग रहा है !” उसको छूने के बहाने मेरे चीर को उंगली से सहला दिया।मेरा बदन कांप सा गया, सिहर सी उठी।”क्या हुआ भाभी?” उंगली मेरी कमीज़ के गले पर अटका कर खींचा, अन्दर झांकते हुए बोले- वाह क्या खूबसूरत वादियाँ हैं?”प्यार से मेरे मम्मे को सहलाया।”प्लीज़ छोड़ दीजिये, कोई देख लेगा, आते बदनाम हो जाऊँगी !”"यहाँ कौन है भाभी? ससुर जी तो उलटे हो गए पी पी कर ! देखो, दरवाज़ा मैंने बंद किया हुआ है ! क्या देख रही थी आप सुबह?”मेरी कमर में बाजू डालते हुए अपनी तरफ सरकाया मेरी छाती उनके चौड़े सीने से दबने लगी।”वाह कितना कसाव है आपकी छाती में, मेरी बीवी तो खस्ता हो गई है।”मैं उनके सीने पर नाज़ुक उँगलियाँ फेरती हुई बोली- क्या खस्ता हो गया उनमें?”सब कुछ ! बिखर गई है !” मेरे होंठ चूमते हुए बोले- रात कैसी निकली भाभी? सही सही बताना !”इनको प्यार करना नहीं आता, औरत की फीलिंग नहीं भांपनी आती, खुद सो गए, मैं पूरी रात झल्लाती रही हूँ।”मुझे घुमा लिया, पीछे से मुझे बाँहों में कस लिया कमीज़ को उठाया और अपना हाथ मेरे सपाट चिकने पेट पर फेरने लगे। मेरे जिस्म में आग लगने लगी।पीछे से मेरी उभरी हुई गांड पर दबाव डाला मुझे इनका लौड़ा खड़ा महसूस हुआ, मैंने भी चूतड पीछे की तरफ धकेले- हाय, एक आप हैं, देखो प्यार करने का अंदाज़ ! आपने अपने हाथों के जादू से मुझे खींच लिया है, वैसे आप बहुत ज़बरदस्त मर्द दिखते हैं।”"असली मर्दानगी तो अभी दिखानी है।” मेरी गर्दन को चूमने लगे।यह औरत को गर्म करने की सबसे सही जगह है। एक हाथ पेट पर था, होंठ गर्दन पर !जीजा जी?” मेरे पति बोले।”यह होटल के कमरे की चाभी है साले साहेब ! नई नई शादी हुई है और घर में कितनी भीड़ है। एक साथ दो दो शादियाँ रख दी गई, मेरे और ॠतु की तरफ से यह स्वीट आपके लिए बुक करवा हुआ है मैंने !” ननदोई जी ने बताया।शर्म से आंखें झुका ली मैंने ! पता नहीं क्या पैंतरा होगा यह ननदोई जी का?”नहीं दीदी, हमें तो सबके साथ रहना है।” मैंने कहा।”शोभा, तब तक संगीत ख़त्म हो जाएगा ! रात ही तो जाना है, हमें कुछ नहीं सुनना !” मेरी ननद बोली।ननदोई जी इनको अपने साथ ले गए, इनको अपनी कार की चाभी भी दे दी, और इकट्ठे बैठ कर दारु पीने लगे, ननदोई जी ने इन्हें भी काफी पिला दी।अचानक से ननदोई जी फ़ोन सुनने के लिए एक तरफ़ गए, फिर ननद के पास गए, बोले- मुझे अभी चंडीगढ़ के लिए निकलना होगा, सुबह आठ बजे एक एहम मीटिंग आ गई है।फ़िर हम दोनों को बुला कर बोले- यार शरद, मुझे अभी चंडीगढ़ निकलना है, माफ़ करना, कार की चाभी मांग रहा हूँ।”कोई बात नहीं जीजा जी, ऐसा करो, मैं तुम दोनों को होटल छोड़ता हुआ निकलता हूँ, सुबह कैब से लौट आना ! ठीक है?”लेकिन खाना?” दीदी बोली।”इनका वहाँ डिनर भी साथ प्लान है और मैंने तो काफी स्नैक्स खाएं हैं चिकन के !”हम वहाँ पहुँच गए आलीशान होटल में ! इनको काफी चढ़ चुकी थी, ये बोले- जीजा जी, डिनर हमारे साथ करके निकल जाना, तब तक पैग शैग हो जाए?ननदोई जी बोले- चल ठीक है।बोतल मेज पर सज गई, मोटे मोटे पैग बनाये, ननदोई जी ने तो अपना थोड़ा पिया, इन्होंने एक सांस में पूरा खींच मारा।मैंने सामने देखा उन्होंने मुझे आँख मारी- तेरा पैग ख़त्म हो गया, यार खाली ग्लास अच्छा नहीं लगता पकड़ यह !ये वहीं लुढ़कने लगे।”खाना कमरे में मंगवा लेते हैं।”एक बहुत प्यारा सा कमरा था, बड़ी मुश्किल से ये कमरे तक गए। मैंने अपना सूटकेस रख दिया, उसमें से गुलाबी रंग की बेहद आकर्षक पारदर्शी नाईटी निकाली क्यूंकि मैं ननदोई जी का पैंतरा समझ गई थी।जब मैं वाशरूम गई, ननदोई जी ने इनको फ़िर मोटा पैग लगवा दिया, ये सोफे पर लुढ़क गए, ननदोई जी ने इन्हें उठाकर बिस्तर पर लिटाया, मुझे देखा तो देखते रह गए।”इसको तो हो गई।”जूते उतारे, कम्बल देकर सुला दिया और मुझे बाँहों में लेकर बोले- बहुत हसीन दिख रही हो रानी !मैंने उनके गले में बाहें डालते हुए उनके होंठों पर होंठ रखते हुए कहा- आपका दिमाग बहुत तेज चलता है?बोले- बियर भी है, एक छोटा सा लोगी? सरूर आ जाएगा।उनके कहने पर मैं एक मग बियर गटक गई, मुझे सरूर हुआ उठकर उनकी गोदी में बैठ गई, आगे से नाईटी खोल दी, काली ब्रा में कैद मेरे मम्मे देख उनका तन तन जा रहा था।ननदोई जी मेरे मम्मे दबाने लगे, मैं सी सी कर रही थी। ब्रा की साइड से निकाल मेरा निप्पल चूसा।”ये कहीं उठ गए तो पकड़े जायेंगे !”"बहुत तेज़ दारु पी है इसने ! वो भी नीट के बराबर !”बोले- डोंट वरी, मैंने दो रूम आगे एक अलग स्वीट बुक किया है हम दोनों के लिए !”इनको सुला कर हम बाहर से लॉक कर चाभी लेकर दूसरे स्वीट में चले गए, वहीं बैठ एक एक मग बियर का पिया, मैंने मेज से सामान उठाया, नाईटी उतार फेंकी, ननदोई जी के सामने नंगी होकर बिस्तर पर लहराने लगी।”हाय मेरी जान शोभा ! बहुत मस्त अंदाज़ की औरत मिली है साला साहेब को !:उन्होंने बोतल पकड़ी मेरे मम्मों पर दारु बिखेरी जो मेरी नाभि में चली गई।ननदोई जी चाटते हुए नीचे आ रहे थे, मेरा बदन वासना से जलने लगा।ऐसे कामुक अंदाज़ कभी नहीं अपनाए, किसी ने मेरे बदन पर ऐसे खेल नहीं खेले थे, जब ननदोई जी ने नाभि से दारु चाटी, मैं कूल्हे उठाने लगी, इन्होंने मेरी पैंटी खींच दी।”हाय, कितनी प्यारी फ़ुद्दी है ! कितनी चिकनी की हुई है मैडम आपने !”मेरी फ़ुद्दी चाटने लगे तो मुझे लगा कि मैं वैसे ही झड़ जाऊँगी, पर मैंने उनको नहीं रोका।उन्होंने मुझे उल्टा लिटाया, मेरी पीठ पर दारु डाल डाल कर चाटने लगे, मेरे चूतड़ों पर दारु टपका कर चाटने लगे।हाय ! मैं ऐसे मर्द के साथ पहली बार थी जो औरत को इतना सुख देता हो !”दीदी ऐसा करने देती हैं क्या?”"हाँ शुरु में मैंने उसको बहुत खिलाया है, अब उसके जिस्म का वो आकार नहीं रह गया जिसको सहलाया जाए, दारु डाल कर चाटी जाए !”वो बोले- चल ननदोई का लौड़ा चाट !मैं भी पूरी रंडी बनकर दिखाना चाहती थी, उनकी आँखों में देखते हुए मैं नीचे से उनके लौड़े को जुबां से चाटते हुए सुपारे तक ले गई, वहाँ से रोल करके लौड़ा चूसा।”हाय मेरी रानी ! मजे से चाट-चूम ! जो तेरा दिल आये कर इसके साथ !”उनका नौ इंची लौड़ा सलामी दे दे कर मेरे अरमान जगा रहा था, मैं खूब खेल रही थी।फ़िर बोले- चल एक साथ करते हैं !69 में आकर मैं उनके लौड़े को चूसने लगी, वो मेरी फ़ुद्दी को चाटने लगे, उंगली से फैला कर दाने को रगड़ते हुए बोले- वैसे काफी ठुकवाई है तुमने !आपको किसने कह दिया जनाब?”"तेरी फ़ुद्दी बोल रही है ! बहुत बड़े शिकारी हैं शोभा हम ! साले साब ने नहीं घुसया क्या?”"इनका बहुत पतला और बहुत छोटा है राजा, घुसाया तो है लेकिन मुझे पूरी रात जलाया भी था।”कुछ देर एक दूजे के अंगों को चूमते रहे, फिर मेरी टांगें उठवा दी और अपने मोटे लौड़े को धीरे धीरे से प्रवेश करवाने लगे, मुझे सच में दर्द हुई, काफी मोटा था। “कैसी लगी फ़ुद्दी? खुली या सही?”"नहीं नहीं ! सही है रानी !” पूरा झटका दिया मेरी सिसकारी निकल गई- आ आऊ ऊऊऊउ छ्हह्ह्ह !वे जोर जोर से पेलने लगे, मैं उनका पूरा पूरा साथ सिसक सिसक कर दे रही थी।ननदोई जी ने मेरी टांगों को हाथों में पकड़ लिया और वार पर वार करने लगे, इससे पूरा लौड़ा घुसता था, कभी घोड़ी बनाते, कभी टांगें उठा उठा कर मेरी लेते रहे।बहुत देर में जब उनका निकलने वाला था तो कहा- कहाँ निकालूँ रानी? बच्चा जल्दी करना है तो अन्दर निकाल देता हूँ, मेरे स्पर्म बहुत मजबूत हैं।”रुको मत ! जो करना है, अंदर करो मेरे राजा ! हाय, जोर जोर से करो ना !”उन्होंने अपना पूरा बीज मेरे पेट में निकाला, मैंने उनका गीला लौड़ा चाट चाट कर पूरा साफ़ कर डाला।”आज मजा आया या कल रात को आया था?”"वो रात मैं भूलना चाहती हूँ वैसी झल्लाती मुझे आज तक किसी ने नहीं छोड़ा था।”"बहुत मस्त माल है तू शोभा ! पसंद आई बहुत ! तेरे चूतड़ बहुत नर्म हैं !” मेरी गाण्ड पर थपकी लगाते हुए बोले।एकदम से दोनों चूतड़ फैला कर गांड देखने लगे- इसमें भी डलवाया है कभी क्या?”आपके इरादे खराब हैं ! आप उन्हें देख कर आओ पहले !”वो जल्दी से उन्हें देख कर आये, बोले- सो रहा है, घोड़ी बन कर गांड को शेक कर जरा !”मैं कोठे पर बैठी हूँ क्या जो आप यह सब करवा रहे हैं?” लेकिन मैंने उनका कहना माना।जब मैं अपनी गाण्ड शेक कर रही थी तो गांड को थपकी देते फैलाया, छेद पे थूका, ऊँगली सरकाई- दी है ना पहले कभी?”लेकिन उसका आपका जितना बड़ा नहीं था !”"चल एक एक पैग लगाते हैं, फिर तुझे कुछ नहीं होगा।”"बहुत कड़वी है।”"खींच जा बस !”मुझे काफी नशा होने लगा था, बियर की बोतल पकड़ कर मुझे घोड़ी बना दिया, पहले गाण्ड पर बियर डाल कर चाटी, खाली बोतल को गाण्ड में घुसाने लगे।यह क्या?”"इससे तेरी ढीली करूँगा !”उनका ज़ालिम लौड़ा फिर से खड़ा था, उसको फ़ुद्दी में घुसाते हुए बियर की बोतल को गांड में देने लगे। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।”हाय ! प्लीज़ ! यह क्या?”फिर बोतल निकाल जोर से लौड़ा उसमें घुसा दिया और पेलने लगे।”हाय फट गई मेरी ! मत करो !”लेकिन उन्होंने पूरी मर्दानगी मेरी गांड पर उतार दी, नशा ना किया होता तो मर ही जाती मैं !उन्होंने जोर जोर से गांड मारी, पूरी रात ननदोई जी ने मेरे बदन का कचूमर निकाल दिया, अंग अंग ढीला कर दिया मेरा !फिर मैं सुबह तीन बजे पति के कमरे में गई और वहीं लेट गई, थकान से कब नींद आई पता नहीं चला।सुबह आठ बजे पति ने मुझे जगाया।”मैं आपसे नाराज़ हूँ, उन्होंने इतना महंगा होटल बुक किया, महंगा कमरा और आपको याद भी नहीं होगा कि कितनी मुश्किल से आपको लिटाया था मैंने !”"आगे से कम पियूँगा।”हम घर लौट आये, आँखों में नशा और नींद दोनों थी।ननदें मज़ाक करने लगी- लगता है पूरी रात को सोये नहीं?ननदोई जी खुद दोपहर को लौटे, रात हुई, काफी मेहमान आ चुके थे, सोने के इंतजाम किये थे।रात को सभी नाचने लगे, डी.जे लगवा लिया था।पति देव पैलेस चले गए थे पूरा कामकाज देखने के लिए, हलवाइयो की निगरानी भी करनी थी।सभी थक कर चूर हो गये, खाना-वाना खाया, जिसको जहाँ जगह मिली, वहीं सो गया।नीचे बिस्तर लगाए थे, सासू माँ ने मुझे कमरे में भेज दिया, बोली- वहीं जाकर सो जा !सभी सो गए, मुझे भी नींद आ गई, काफी रात को मैंने अपने ऊपर किसी को महसूस किया।बोले- मैं हूँ।”आप फिर?”ननदोई जी ही थे।”आज भी?”"चुप ! तेरी आदत लग गई है, रानी जरा सलवार ढीली कर ले !”"आप भी ना? कोई आ गया तो?”सभी थक कर सो गए, हम नाचे नहीं थे इसलिए थके नहीं, थकने आये हैं !” वो लौड़ा लेकर सिरहाने की तरफ सरक गए जिससे उनका नाग देवता मेरे होंठों से टकरा गया।मैंने झट से मुँह में लेकर चुप्पे मारे ,सलवार खोल कर बोली- आज खुलकर खेलने का दिन नहीं है !”हाँ हाँ !”मैंने टाँगें उठाई और जल्दी से घुसवा लिया और दनादन झटके लगा लगा कर दस मिनट में ही आज वो पानी निकाल गए।उनको जब में कमरे से बाहर निकालने गई, मुझे लगा कि किसी ने देखा ज़रूर है, यह नहीं पता चला कि कौन था।वो तो चले गए, मैं घबरा गई।

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

दो को चोदा

दो 
मैं २५ साल का युवक हूं मुझे चोदने कि बहुत इच्छा थी लेकिन मुझे किसी को चोदने का मौका नहीं मिला था। मेरी पड़ोस में एक यंग कपल (जोड़ा) रहता था। उनके साथ मेरे घरवालों का अच्छा रिश्ता था। उनके घर मेहेमान आये थे उन दोनो की मां एक साथ आयी थी। दो तीन दिन के बाद मेरे घर वालों ने और उस कपल ने बाहर घुमने प्रोग्राम बनाया, मुझे जरूरी काम था इसलिये मैं जाने वाला नहीं था मैं घर में ही रहने वाला था। उस कपल ने मेरे घर वालो को बोला की दीपक (मेरा नाम)हमारे घर खलेगा क्योंकि उनकी दो मातायें भी जाने वाली नहीं थी। मैं उनकी बातों पर मंजूर हो गया। दूसरे दिन वो सब घूमने के लिये चले गये.मैं ओफ़िस से वापस आने के बाद फ़्रेश होके टी वी देखता था तब फोन करके मुझे खाने को बुलाया। मैं गया मैं ने बेल बजायी एक आंटी ने दरवाजा खोला मैं घर में गया। मैने घर में जाके उन दोनो को देखा और मैं चकित हो गया वो दोनो बहुत ही खूबसूरत थी कोई सोच भी नहीं सकता कि वो एक ३५ साल के कपल की मातायें थी। उन दोनो ने साड़ी पहन रखी थी उनका ब्लाउज़ को उनके बूब्स पकड़के रखने में तकलीफ़ होती होगी, उनके सुंदर और गठीले बूब्स ब्लाउज़ को तोड़ के बाहर आने को मांगते थे उनके काला बाल किसी नागिन जैसे लगते थे, खूब सूरत नशीली आंखें और गठीला बदन मैं देखता ही रहा। तो उनमे से एक बोली क्या देखते हो बैठो यूं खड़े ही रहोगे क्या तब मैने कहा कि तुम्हे मैं पहले बार देखता हूं और मैं तुम्हे पहचानता नहीं हूं इसलिये तुमको देखता हूं। मेरी आपसे ये पहली मुलाकात है, तो वो बोली हा जी और मैं सोफ़े पर बैठ गया। उन दोनो ने अपना अपना परिचय करवाया, जो लड़के की मां थी उसने अपना नाम रमा बताया दूसरी ने अपना नाम शीला बताया। मैने कहा तुम दोनो समधन हो।वो बोली हां, जी। फिर उन्होने खाने के टेबल पर मुझे बुलाया और हम खाने लगे। लेकिन खाना खाते समय मैं अजीब सा महसूस कर रहा था मैं उन दोनो का विचार ही कर रहा था और मेरा लौड़ा खड़ा हो गया था वो दोनो मुझे देख के बोली क्या सोचते हो मैं ने कहा कुछ नहीं तो रमा बोली नहीं तुम कुछ छुपाते हो तब मैने कहा की तुम्हारी उमर वाली स्त्री को हमारे पड़ोसी की उमर का लड़का लड़की कैसे हो सकता है तो वो बोली तुम सही कहते हो, वो दोनो हमारी सौतन के बेटी बेटे हैं हम दोनो उनकी नयी मां है। हम दोनो की अपने अपने पति के साथ दस साल पहले शादी हुई थी और पांच साल के बाद मेरी लड़की की शादी शीला के लड़के के साथ हुई और उनकी शादी के दो साल बाद हमारे पति गुजर गये हमारी शादी हुई थी तब हमारे पति की उमर ५० साल थी हमारे कोई बच्चे नहीं हैं।उनकी बातों से मैं समझ गया कि उनकी सेक्स लाइफ़ अच्छी नहीं होगी हम लोगो ने खाना खा लिया उसके बाद उन्होने पूछा कि तुम ड्रिंक्स लोगे, मैने कहा कि नहीं फिर शीला ने बोला हम तो दारु पीने के आदी हैं हम रोज खाने के बाद पीते हैं मैने कहा मुझे कोई ऐतराज नहीं है फिर उन दोनो ने शराब पी। फिर हम तीनो सोफ़े पर बैठकर टी वी देखते रहे। मैं ने लुंगी पहनी थी मैं सोफ़े के सामने वाली कुर्सी पे बैठा था मेरा लौड़ा खड़ा था मेरी बगल में रमा बैठी थी। वो मेरे खड़े लौड़े को देख रही थी, उनकी नज़र मेरे लौड़े पर थी मैने उनको लौड़े को देखते देख लिया तो वो शरमा गयी। मैने उनको पूछा कि क्या देखती हो तो वो कुछ बोली नहीं लेकिन रमा ने कहा वो तुम्हारी लुंगी देखती है मैने कहा कि लुंगी में देखने जैसा क्या है तो वो बोली तुम्हारी लुंगी हिलती क्यों है? वो देखती है, मैने कहा मुझे पता नहीं तुम मुझे बताओ कि लुंगी क्यों हिलती है तो वो मेरे पास आयी और बोली कि देखो यहां से हिलती हैऐसा बोल के उसने मेरे लौड़े पर हाथ रख दिया और बोली ये क्या है तो मैं बोला खुद देख लो उन दोनो पर शराब का असर हो चुका था मैं भी, आज उन दोनो को चोदने मिलेगा, इसलिये खुश था तो रमा ने मेरी लुंगी उठाई और मेरे खड़े लंड को देख कर बोली ये लंड है कि हथौड़ा फिर मैने उनको खींच के अपनी गोद में बिठाया और उनका बलाउज़ मैने खोल दिया हुक भी खोले उनके घांघरे का हिस्सा उसने ऊपर किया और बोली देखो ये लंड का घर है उसको इसमे रखो फिर इतने में रमा आयी और शीला को मेरे गोद मैं देख के बोली गोद में क्यों बैठी है पलंग पे ले जा तब मैं ने रमा को अपनी तरफ़ खींचा और उसका नाड़ा खोल दिया और उनकी पुस्सी को सहलाने लगा अब मेरा एक हाथ में शीला के बूब्स थे, दूसरे हाथ में रमा की पुस्सी। उसके बाद हम तीनो बेडरूम में आये मैने उनदोनो को नंगा कर दिया था उन्होने मुझे और वो दोनो मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगी फिर मैने रमा के बूब्स चूसने लगा।शीला मेरे लंड को चूसने लगी बाद मैं रमा ने शीला को हटा दिया और वो लंड को पीने लगी और मैं रमा की चूत को चाटने लगा और एक उंगली रमा की चूत में डाल के हिलाने लगा दोनो मस्त हो चुकी थी फिर रमा ने मुझको लिटा दिया मेरा लंड अपनी चूत में डाल लिया, मैं जोर से अंदर बाहर करने लगा वो गालियां बोलती रही और वो और मैं एक साथ खल्लास हो गये फिर शीला और रमा ने लंड के साथ खेलने लगी मेरा लंड फिर से तैयार हो गया और इस बार शीला ने लंड को अपनी बुर में ले लिया और मैं अंदर बाहर करने लगा वो भी खुश होकर गालियां बोलने लगी ओर काफ़ी देर के बाद वो भी खल्लास हो गयी उसके बाद सारी रात ये चोदा-चादी चालू रही।

शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

शाम को फाड़िए मगर प्यार से

फ
नेहा के साथ मेरे अधूरे संभोग ने उसे पाने की मेरी इच्छा को और बढ़ा दिया था। मैं अगले ही दिन शाम को सुगंधा के छात्रावास पहुँचा। मैंने उस तक संदेशा भिजवाया कि बहुत जरूरी काम है जल्द से जल्द वो बाहर आ जाए। वो बाहर निकली। उसने सलवार सूट पहन रखा था।उसने पूछा, “क्या हुआ भैया, इतने दिनों तक मेरी कोई खोज खबर नहीं ली आपने और अचानक इतना जरूरी काम आ पड़ा कि दौड़े चले आए? कल सुबह आठ बजे से मेरी पहली कक्षा है, उसके लिए मेरा कुछ काम बाकी रह गया है, जो कहना हो जल्दी कहिए।”मैंने कहा, “तुमसे कुछ जरूरी बातें करनी हैं जो यहाँ खड़े खड़े नहीं हो सकतीं। चलो मेरे साथ। मैं कल एकदम सुबह सुबह तुम्हें वापस छोड़ जाऊँगा।”वो बोली, “तो क्या मैं रात भर आपके साथ रहूँगी।”मैंने कहा, “हाँ।”वो मुस्कुराकर बोली, “तो मैं अपने कपड़े ले लूँ और पुस्तक-पुस्तिका भी ले लूँ ताकि मैं अपनी पढ़ाई कर सकूँ।”मैंने कहा, “हाँ ले लो।”वो अपने कपड़े और अन्य सामान लेकर बाहर आई। हम कमरे पर आ गए। जैसे ही मैंने दरवाजा अंदर से बंद किया उसने अपने हाथ में थमा सामान बिस्तर पर फेंका और पीछे से मुझसे लिपट गई।मैंने कहा, “यह क्या कर रही हो? तुम्हें तो पढ़ाई करनी है न? हम दोनों चचेरे हैं तो क्या हुआ, हैं तो बहन भाई ही न। अब तक हमारे बीच जो कुछ हुआ वो सब मेरी भूल थी। अब आगे से हम दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं होगा।”उसने मुझे छोड़ दिया और अपनी कमर पर दोनों हाथ रखकर खड़ी हो गई और अजीब से नज़रों से मुझे देखने लगी, उसने कहा, “क्यों कोई और मिल गई है क्या?”ये लड़कियाँ संभोग करने के बाद ज्यादा समझदार हो जाती हैं क्या? मैंने कहा, “हाँ।”उसने पूछा, “कौन?”मैंने कहा, “वो पड़ोस में जो राधा रहती है ना वो।”उसने कहा, “ये राधा कौन है? पहले तो आपने कभी उसका जिक्र नहीं किया।”मैंने कहा, “पहले कभी मौका नहीं लगा।”उसने कहा, “तो अब मैं क्या करूँ?”मैंने कहा, “तूम भी अपने लिए कोई पुरुष मित्र ढूँढ लो। हमारे बीच ये सब ठीक नहीं है।”उसने कहा, “तो मुझे यहाँ क्यों लेकर आए?”मैंने कहा, “कुछ पूछना है तुमसे इसलिए।”वो बोली, “क्या पूछना है?”मैंने कहा, “जब मैंने पहली बार तुम्हारी योनि में अपना लिंग डाला था तो ज्यादा खून नहीं निकला था और दर्द भी तुम सह गई थी। लेकिन जब मैंने राधा की योनि में लिंग घुसाने की कोशिश की तो ढेर सारा खून निकला और उसे इतना दर्द हुआ कि उसने घुसवाने से मना कर दिया। तुम तो जीव विज्ञान की छात्रा हो बताओ ऐसा क्यूँ हुआ।”उसने कहा, “तो इसलिए मुझे लेकर आए हैं आप। जाइये नहीं बताऊँगी।”मैंने कहा, “प्लीज सुगंधा बता दे न यार। प्लीज।”वो बोली, “एक शर्त है।”मैंने कहा, “क्या?”उसने कहा, “आज रात आपको मेरे साथ संभोग करना होगा।”मैंने कहा, “नहीं मैं नहीं कर सकता।”उसने कहा, “तो जाइए मैं नहीं बताती।”यह लड़की भी न। चलो झूठ मूठ का वादा कर देता हूँ बाद में तोड़ दूँगा तो यह क्या कर लेगी, मैंने कहा, “अच्छा ठीक है। लेकिन सिर्फ़ आज की रात, उसके बाद कभी नहीं।”वो खुश हो गई और उसने बताना शुरू किया, “हर लड़की की योनि के भीतर योनि का छेद ढँकने के लिए एक झिल्ली होती है जिसकी मोटाई, आकार एवं आकृति अलग अलग लड़कियों में अलग अलग होती है। मेरी योनि की झिल्ली पतली रही होगी और उसका छेद बड़ा रहा होगा जिससे मुझे दर्द कम हुआ और आपने आसानी से फाड़ दी। राधा की योनि की झिल्ली काफी मोटी होगी और उसका छेद भी छोटा सा होगा जिसकी वजह से आप उसे नहीं फाड़ पाए होंगे और मोटी झिल्ली में रक्त की नसें ज्यादा होने से खून भी खूब निकला होगा।”मैंने कहा, “तो अब मैं क्या करूँ। कैसे फाड़ूँ इस झिल्ली को।”वो बोली, “प्यार से फाड़ोगे तो हर झिल्ली फट जाएगी। पहले कोई पतली सी चीज क्रीम वगैरह लगा कर उसके भीतर डालो फिर और मोटी डालो फिर और मोटी। धीरे धीरे योनि की मांसपेशियाँ ढीली होती जाएँगी। आखिर बच्चा भी तो इसी छेद से निकलता है। यह ध्यान रहे कि यह काम रोज करते रहिएगा वरना मांसपेशियाँ फिर अपने पुराने आकार में आ जाएँगी। यह वैसे ही है जैसे कान में छेद करके अगर कुछ पहना दिया जाय तो छेद बना रहता है वरना भर जाता है। जैसे बच्चा निकलने के बाद योनि का छेद फिर अपने पुराने आकार में आ जाता है। इस तरह धीरे धीरे मगर लगातार छेद चौड़ा करते जाइए। अंत में तो आपका भीमकाय लिंग है ही।”मैंने कहा, “इसमें तो कई दिन लगेंगे।”उसने कहा, “सब्र करना सीखिए। सब्र का फल मीठा होता है।”मैंने कहा, “एक बात और पूछनी है।”उसने कहा, “क्या?”मैंने पूछा, “तुमने उस दिन संभोग के दौरान कहा था कि आज सुरक्षित समय है। यह सुरक्षित समय क्या होता है?”उसने कहा, “माहवारी आने के पाँच दिन पहले और खत्म होने के दो दिन बाद तक का समय सुरक्षित होता है। इसके अलावा बाकी सारे दिनों में वीर्य योनि के भीतर डालने पर लड़की को गर्भ ठहर सकता है।”मैंने पूछा, “ऐसा क्यों होता है?”वो बोली, “अब पूरी बात समझाने में तो मुझे सुबह हो जाएगी। यह समझ लीजिए कि यदि आप शादीशुदा होते तो पहले सात दिन और बाद के तीन दिन सुरक्षित होते हैं। लेकिन आप शादीशुदा तो हैं नहीं इसलिए बिल्कुल भी खतरा मत मोल लीजिएगा। पाँच दिन पहले के और दो दिन बाद के, बाकी के दिन बाहर डिस्चार्ज के।”मुझे हँसी आ गई। यह तो वाकई पढ़ाकू लड़की है। या हो सकता है कि मेरे साथ संभोग के बाद इसने ये सब पढ़ा हो ताकि जान सके कि कब गर्भ ठहरने का खतरा है कब नहीं।सुगंधा बाथरूम में गई। मैं बिस्तर पर बैठकर सोचने लगा कि क्या बहाना करूँ ताकि इसके साथ संभोग न करना पड़े। वो बाहर निकली। उसके शरीर पर सिर्फ़ पैंटी और ब्रा थी। यह लाल वाली पैंटी तो मैंने ही खरीदी थी। जानबूझ कर मैंने दस में से तीन पैंटी छोटी छोटी खरीदी थी। खरीदते समय मुझे यह पता नहीं था कि मैं नेहा से संभोग कर बैठूँगा और वो मुझे सुगंधा के साथ संभोग करने से मना कर देगी। सुगंधा ने पता नहीं कब जाकर लाल रंग की ब्रा भी खरीद ली थी।क्या लग रही थी वो। उसका हल्का साँवला रंग बल्ब की सुनहली रोशनी में जगमगा रहा था। मेरे हृदय ने जोर लगा लगाकर मेरे लिंग में अतिरिक्त रक्त भेजना शुरू कर दिया। छोटी सी पैंटी जो आधी पारदर्शी थी उसमें से साफ दिख रहा था कि उसने अपनी योनि के बाल साफ कर लिए हैं।हे कामदेव, यह लड़की तो पूरी तैयारी के साथ आई है।वो कमर पर हाथ रखकर थोड़ा सा तिरछा होकर खड़ी थी। मैं अपनी आँखें बंद कर लेना चाहता था मगर पलकें मेरा साथ नहीं दे रही थीं। जब मैं थोड़ी देर तक नहीं उठा तो वो रसोई के अंदर गई। बाहर आई तो उसके हाथ में शहद की शीशी थी। उसने अपनी ब्रा उतार दी। उसके मांसल उरोज जो आज और बड़े लग रहे थे, फड़फड़ा उठे। वो शीशी में से शहद निकालकर अपने चूचुकों पर लगाने लगी।अब बात मेरे बर्दाश्त के बाहर थी। मैं उठा और उसके पास गया। उसके एक चूचुक को मुँह में लेकर पागलों की तरह शहद चूसने लगा। वो आहें भरने लगी। सारा शहद चूसकर मैंने दूसरे चूचुक को मुँह में लिया। उसका भी शहद चूसकर सुखा दिया। मैंने शहद की शीशी उसके हाथ से लेकर वहीं जमीन पर रख दी। फिर मैंने उसे गोद में उठाया और ले जाकर बिस्तर पर पटक दिया।मेरा लिंग पूरी तरह तना हुआ था। मैंने उसकी पैंटी एक झटके में उतार दी। उसकी चमकती हुई सफाचट योनि मेरे सामने थी, मैंने उसकी योनि को मुँह में भरकर चूसना शुरू किया। मुझसे जितना हो सकता था मैं उतनी तेजी से योनि चूस रहा था। फिर मैंने योनि को थोड़ा सा फैलाकर उसके भीतर स्थित मटर के दाने को चूसना शुरू किया। वो मस्त होकर अपनी कमर उछालने लगी। अब सुगंधा पूरी तरह गर्म हो चुकी थी। मैंने मौके का फायदा उठाने का निर्णय किया।मैं एक झटके से उसकी योनि छोड़कर उठा और शहद की शीशी उठाकर ले आया। मैंने फटाफट अपने कपड़े उतारे और अपना लिंगमुंड निकाल कर उस पर शहद लगाया।सुगंधा ने आश्चर्य से मेरी ओर देखा, उसने पूछा, “शहद लगाकर डालेंगे क्या।”मैंने कहा, “डालूँगा तो मगर तुम्हारी योनि में नहीं, तुम्हारे मुँह में।”उसने जोर से मुँह बंद कर लिया और अपना सिर हिलाने लगी। मैं उसके ऊपर इस तरह बैठ गया कि मेरा भीमकाय लिंग उसके मुँह तक पहुँचे। मैंने एक हाथ से उसका चेहरा पकड़ा और दूसरे हाथ से उसके होंठों पर अपना लिंग रगड़ने लगा। शहद उसके होंठों पर लग चुका था। अब मैंने एक हाथ से उसकी नाक बंद कर दी। उसने साँस लेने के लिए अपना मुँह खोला और मैंने अपना लिंग उसके मुँह में डालकर उसकी नाक छोड़ दी। वो जोर जोर से साँस लेने लगी। साँस रुकने की वजह से कुछ पलों के लिए लिंग पर से उसका ध्यान हट गया था।लिंग पर लगा शहद उसके मुँह में घुलने लगा। उसने अपना चेहरा हिलाकर लिंग निकालने की कोशिश की मगर मैंने एक हाथ से उसका चेहरा कस कर पकड़ा हुआ था। कुछ क्षणों बाद उसने हालात से समझौता कर लिया। शहद उसके मुँह में लार के साथ मिलकर उसके गले में उतर रहा था। मीठा मीठा शहद उसे अच्छा लग रहा था।मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किया। वो अभी भी लिंग चूसने के मूड में नहीं थी। लेकिन अब मैं बिना चुसवाए उसे छोड़ने वाला नहीं था। कुछ देर तक मैंने धीरे धीरे लिंग मुंड अंदर बाहर किया फिर मैंने अपनी गति बढ़ा दी। जब लगा कि मैं अब सँभाल नहीं पाऊँगा और इसके मुँह में ही मेरा वीर्य गिर जाएगा तो मैंने अपना लिंग बाहर निकाला।वो बोली, “छिः बहुत गंदे हो गए हो आप।”पर अब लिंग को छोड़कर मेरी बाकी इंद्रियों ने काम करना बंद कर दिया था। मैं तुरंत उसके ऊपर आया और उसकी योनि पर लिंग रखकर एक जोरदार झटका मारा। मेरा लिंगमुंड उसकी योनि में उतर गया।वो चीख पड़ी।मैंने पूछा, “क्या हुआ?”वो बोली, “दर्द हो रहा है।”मैंने कहा, “क्यों। तुम्हारी योनि तो मैं पहले ही फाड़ चुका हूँ।”वो बोली, “इतनी जल्दी भूल गए मैंने कहा था न कि यदि लगातार संभोग न किया जाय तो योनि अपनी पहली वाली अवस्था में आने लगती है ऊपर से आपका लिंग इतना मोटा है। हर हफ़्ते मेरे साथ संभोग करते रहिए तो मुझे दर्द नहीं होगा। और एक बात तो आप हमेशा के लिए गाँठ बाँध लीजिए आपके भीमकाय लिंग को देखते हुए बहुत काम आएगी। फाड़िए मगर प्यार से।”कहकर उसने हथेलियों में अपना मुँह छिपा लिया।बात तो वो सही कर रही थी मुझे अपने लिंग पर उसकी योनि का कसाव महसूस हो रहा था। मैंने अपने आप को काबू में किया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। मेरा लिंगमुंड उसकी योनि की गहराइयों में उतरने लगा। थोड़ी देर बाद मेरा पूरा लिंग उसकी योनि में समा गया।अब मैंने धक्कों की गति बढ़ा दी। तेजी से उसकी योनि में अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा। उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं। वो अपने नितंब उठा उठाकर मेरा साथ देने लगी। मैंने उसे कसकर अपनी बाहों में ले लिया और जोर जोर से धक्के मारने लगा। उसने भी मुझे कसकर चिपका लिया। एक बार फिर मेरे मुँह से गंदे गंदे शब्द निकलने लगे।फिर मैंने उसकी टाँगें अपने नितंबों के ऊपर चढ़ा लीं। अब उसके गर्भाशय तक मेरा भीमकाय लिंग पहुँच रहा था। मैंने उसके कान में कहा, “सुगंधा मेरी जान योनि के अंदर वीर्य गिरा दूँ।”वो बोली, “गिरा दीजिए। सुरक्षित समय है।”मैंने और कसकर उसे पकड़ लिया और पूछा, “सुगंधा मेरे बच्चे की माँ बनेगी।”वो बोली, “हाँ बनूँगी। मेरी योनि में अपना सारा वीर्य डाल दो। मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ।”उसके मुँह से ऐसे शब्द सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया। मैंने और जोर जोर से धक्के मारना चालू कर दिया। थोड़ी देर बाद मेरा वीर्य निकल निकलकर उसकी योनि में गिरने लगा। वो भी मुझसे कसकर चिपक गई। उसका बदन काँपने लगा। थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे लेटे अपनी साँसें व्यवस्थित करने की कोशिश करते रहे। फिर मैं उठा और बाथरूम गया। वापस आकर मैंने अपने कपड़े पहने। सुगंधा ने भी यही किया।अचानक उसने मुझसे पूछा, “आपकी यह राधा नेहा ही है न।”मुझे आश्चर्य हुआ कि इसे कैसे पता चल गया, मैंने कहा, “नहीं तो?”वो बोली, “सोच लीजिए अगर नेहा हो तो मुझे उससे मिला लीजिए, मैं उसे सब समझा दूँगी। फिर वो आपके लिंग से डरना छोड़ देगी। वरना आपकी मर्जी। मेरा क्या जाता है।”मैं थोड़ी देर तक सोचता रहा। बात तो इसकी सही है। एक लड़की ही दूसरी लड़की को संभोग के बारे में विस्तार से समझा सकती है। मैं सुगंधा को लेकर नीचे गया। मकान मालिक अभी आए नहीं थे। मकान मालकिन और नेहा नीचे थे। मैंने उन्हें नमस्ते किया और उनके पास बैठ गया।उन्होंने नेहा को चाय बनाने के लिए भेजा तो सुगंधा ने कहा- मैं भी मदद करती हूँ !और वो भी भीतर चली गई। दोनों चाय बनाकर लाईं। हमने चाय पी। थोड़ी इधर उधर की बातें हुईं फिर मैं और सुगंधा ऊपर आ गए।ऊपर आकर सुगंधा ने कहा- अब आप जाइए और घूम घामकर तीन चार घंटे बाद आइएगा, मैंने नेहा को बुलाया है, वो आएगी तो मैं उसे सब समझा दूँगी।हे कामदेव यह लड़की कितनी बेशर्म हो गई है। अभी एक साल पहले की ही बात है मैं इसके सामने मुँह से गालियाँ निकालते हुए भी डरता था और अब ये मेरे लिए लड़की तैयार कर रही है।”हे कामदेव, तुम जो न करवा दो।”

Enhanced by Zemanta

रविवार, 20 जनवरी 2013

Hindi Sex Stories: Lady Doctor Ki Gand

Hindi 

mera naam kamran hai aur age 19years,higet6.3aur main kafi handsome hoon.
main aaj aap ku apni real story sunaney ja raha hunn.
main lahore ke aik achay muhalay main rehta hunn.aur baifsc ka student hunn.main aaj tak xxx movies bi dekhi hain aur buhut sarri sexy stories bi pari hain.lakin aaj tak kessi aurat se sex nahi kiya hai.
yeh koi6 mahenay pehlay ki baat hai ke mere paid ke nechay aur lun ke nazdek aik dana nikale aaya tha.pehlay tu main ne ussay ignore kia lakin kuch denoo ke badh woh dana kafi bara hugaya tu main kafi pershan hu gaya.mere aik doost ne mujay mushwura deya ke tum kessi skin spechilist doctor se check kerau.tu main ne aik lady doctor ke pass gaya aur ussay sara musla bataya.lady doctor ne kaha ke dana dekhay baghir main nahi pata sakti ke yeh kess keasam ka dana hai.
lady doctor jiss ka naam ghazala tha kaffi beautiful thi.uss ke umer 36 hu gi.aur uss ke lips buhut putlay aur khubsurat thay. aur uss ke baalkafi bare thay aur uss ne apne baal khulay huay thay jo ussay buhut achay lag rahey thay.aur uss ke mummy kafi bare thayjo thakrebunn 38 ke hunn gey.
tu baat yeh hu rahi thike lady doctor ne kaha ke tumhare dana dekhney ke badh hi main yeh bata sakti hunn ke wohkiss kisam ka hai.ladydoctor ne mujay bed per letnay ku kaha .aur main bed per late gaya tu lady doctor ne mujay apni pent khulnay ku kaha.tu main ne apni pent khol ker nechay ghutnu tak ker li.dana lund ke pass tha iss liy lady doctor ne mujay underwear bi nechay kernay ku kaha.aur jab main ne apna underwear nechay kia tu mera 9inch lamba aur 3 inch mota aur red colour ka lun bi samney aa gaya .lady doctor ne jab mera lun deka tu heran raeh gai aur boli ke tuhara lun tu buhut hi lamba aur mota hai. phir lady doctor aik tika le aai jo uss ne mere paid me dane ke pass lagay aur mujay late rehnay ku kaha . phir laday doctor bed per meray sath he baith gai aur mera lun paker lia main buhut heran hua aur uthne ki koshish ki tu uss ne mujay letay rehnay keliy kaha aur lady doctor khud bi mujay kafi achi lagi thi issliy main bi lita raha.phir woh mera lun hath main le ker meri muth marne lagi.phir mera lun kafi hard hu gaya tu woh mera lun per juki aur meray lun per apni zuban pherne lagi aur mujay buhut maza aane laga.phir lady doctor ne mera adha lun muh main le ker chusne suru ker dia.takrebun 10min ke badh jub main farig hune ke qareeb hua tu main ne lady docdor ku bataya tu uss ne kaha ke mere muh main hi farigh hu jao phir thoro der ke badh main farigh hu gaya.aur lady doctor ne meri sari mani peli. iss ke badh main ne apni pent pehan ker jane laga tu lady doctor ne mujay apne pass bulayaaur meray huthoon per kiss ker di.kiss kerney ke badh uss ni mujay apna address deya aur kaha ke raat ku 9pm per meray gher per ana tu main buhut kush hua aur wapis gher huga .main raat ke 9 bujne ka intezar kerne laga.
jub 9 bujne wale thay tu main uss ke ghar gaya tu derwaza lady doctor ne hi khola aur mujay dekh ker woh buhut kush huiaur mujay ander aae ku kaha.phir woh mujay apne bed room me ley gi.bedroom main jatey hi uss ne mujay zoor se paker ker kiss kerna shuru ker dia5min kss kernay ke bad uss ne mujay chora aur kaha ke pehlay kahna kaha letay hain baqi kam badh main keray gay.tu main ne kaha ke main tu gher se kahna kah ker aaya hu tu uss ne mujh se kahna kahne ki zidd ke tu main bi uss ke sath kahna kahne lagakahne ke doran main ne uss se poucha ke tum yahan akeli rehti hu tu uss ne kaha main apne bhai ke sath rahtyi thi lakin bhai aik mahene se uk main sattle hai aur main aik mahene akeli rehti hunn.phir kana kahne ke badh uss ne kaha ke main change ker ke aati hu5 min ke badh jub woh aai tu woh sirf brazer aur aik buhut hitang trozer main aai jiss main woh buhut sexy lag rahi thi.tang trower pehnne ke waja se uss ke gand nazer aa rahi thi aur main ne pehli bardeka ke uss ke gand buhut barihai.woh meray pass aai aur mujay kiss ke aur uss ne meri shurt utar diaur phir main ne uss ka brezer ka hik khol dia aur uss ke mumay nange hu gay uss ke mummy buhutbare thay main uss ke mumu ku chusne lagaaur mummu ka nippli muh main le ker chusne laga .15 min ke bath uss ne meri pent kohli aur pent ke sath mera underwar bi utar dia aur mera 9inch ka lun muh main le ker chune laged urr apni gand meri taraf er di main tu uss ki gand dekh ker paga hu gaya.aur main trozer ke upper se hi uss ki gand chusne lag gaya.phir main ne uss ka trozer uthara aur ab uss ke gand meray samney puri nangi thi aur uss ke and ka size 42 tha.main uss ki gand wale surag ku shumne laga 10 min ke ke badh woh sedi hui aur apni choot ka surah mere lun per rakhqaur zoor se uss ke upper bait gaimera takrebun 3inch uss ke choot main chala gayaaur phir woh aram aram se mere lun ku apni choot main lene lagi kuch der ke badh jub woh ful garam hu gai tu woh zoor se uchalne lagi mera sara lun uss ke choot main nahi ja raha thuss ne mera 7 inch lun ander liya uss zoore zore se upper nichay hune lage 20 min ke badh woh farigh hu gitumeray lun se utar ker bed per late gai.
aur main usske mumay chusne lag gaya tu uss ne mujay kaha keh tum ne tu mujay pagal hi ker dia hai aur tumhare motay lun ne mere chootb hi paar di hai .phir main ne uss se kaha ke main tumhare gand marna chahta hunn tu uss ne kaha ke main ne kabi gand main nahi lia hai aur tumhara lun tu meri gand hi phar de ga .tu main ne uss se kaha ke kuch nahi hu ga mus thora sa derd huga.laki woh nahi manitu main uss se narraz hu gaya aur apni pent pahne lag gay lakin uss ni mujay paker lia aur kha ke thik hai ager tum meri gand marna chahte hi tu mar lu lakin aik shart per ke tum aram aram se meri gand maro gay
tu main ne kaha ke thik hai .phir woh bed ke side per gori ban gi aur main ne apne lun per thora sa thuk lagaya aur thora sa thoke uss ke gand per lagaya.phir main ne apne lun ki toppi uss ke gand ke surag per rakh ker thora sa zoore lagaya to meray lu ke topi uss ke gand main chli gai aur lady doctor dard se kerane lagi AAAAAAAAAAAHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHHH aur phir zor zor se chekain marne lagitu main ne zhori der apna lun uss ki gand main hi rehne deya aur jub woh chup ker gai tu main ne aik zore se dakha lagaya tu mera6inch lun uss ki gand main dediyatu woh mujay galian denay lag gai harami tu meri gand phar de ga.ghandu galdi se apna lun baher nikalo lakin main ne apna lun pahir nahi nika thori der ke badh usse bi maza ane laga tu main halke halke se gutke marne lag gay tu woh zore zore se chilane lag gai ke aur zore se phar de meri gand.tu main zore zore se ghand marne lag gaya phir main ne sara lun uss ke gand main de dia aur main takreebunn 25 min ke badh uss ke gand main farig hu gaya .phir main ne uss ke gand se apna lun pahir nikal tu uss ke gand suji hui thi
aur uss ku gand main kafi taklif hu rahi thi
uss ke badhuss ratt main 2bar uss ki choot aur 2 bar uss ke gand mari subah jub main gher jane laga tu main ne ussay apna ,mobile number dia aur abb hum her raat aik sath guzartay hain

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

ch 1

ch 1