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बुधवार, 12 जून 2013

उत्तम वंश वृद्धि के उपाय


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सभी दम्पतियों की इच्छा होती है कि उसके बाद उसका पुत्र उसके वंश को आगे चला सके। इसलिए वे चाहते हैं कि उनके वंश को चलाने के लिए पुत्र का जन्म होना आवश्यक है। वैसे देखा जाए तो उत्तम वंश की परंपरा जो हमारे पुरखों द्वारा छोड़ी गई है, उसे चलाए रखने के लिए बड़े, बूढ़े, शादी-विवाह के अवसर पर कुल-गोत्र का मिलान करते हैं। वंश परम्परा तथा चलन को देखने के लिए खान-पान तथा आचार-विचार पर ध्यान दिया जा सकता है।
बहुत से विद्वानों का कहना है कि जिन स्त्री-पुरुषों में प्रेम अधिक होता है, उनके द्वारा उत्पन्न पुत्रों के गुण उनके स्वयं के गुणों से मिलते-जुलते हैं। शरीर की सुन्दरता और उसके अंदर के गुण जिस स्त्री तथा पुरुष में होते हैं, उनमें हमेशा ऐसे पुत्र को प्राप्त करने का लालच होता है जिसके अंदर ठीक उसकी छवि दिखाई दे और जिससे पीढ़ी दर पीढ़ी तक वही नस्ल चलती रहे।
हम आपको यह बताना चाहते हैं कि उत्तम संतान की प्राप्ति तभी हो सकती है जब तक पति-पत्नी में गहरा प्रेम, उमंग, आनन्द, वासना और उत्साह भरा हो। उत्तम संतान प्राप्त करने के लिए पति-पत्नी को उत्तम स्थिति में रहना जरूरी है। इसलिए कहा जा सकता है कि गर्भाधान के समय में दम्पत्ति की जो मनोवृत्ति होती है उसका गर्भ पर स्थिर प्रभाव पड़ता है।
शारीरिक और जातीय प्रवाह के कारण से उत्पन्न हुए मनुष्य का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जो परस्पर सिलसिला बना रहता है तो उसे ही वंश परम्परा के नाम से जाना जाता है।
मनुष्यों के शरीर में जो परमाणु होते हैं, वे अपने आकृति को दूसरे की तरह धारण करने की कोशिश करते हैं। वही बाद में पीढ़ी दर पीढ़ी बच्चों में उतरते हैं, जैसे- आंखों का रंग, त्वचा, बाल, वजन, कद, शारीरिक तथा मानसिक बल, बोलने की कला, गाने बजाने में विशेषता, देखने में अंतर, सुनने की शक्ति, पैतृक नशेबाजी, पैतृक रोग जैसे टी.बी. या मिर्गी तथा उपदंश आदि स्वाभाविक ही उनमें प्रकट हो जाया करते हैं। जिनके माता-पिता जिन-जिन रोगों से ग्रसित होते रहते हैं उसी प्रकार के रोग उनके बच्चों को भी होने का खतरा बना रहता है।
वैसे देखा जाए तो मनुष्य केवल अपने माता-पिता से ही उत्पन्न नहीं हुआ करता है बल्कि जिस बीज से बच्चे की उत्पत्ति होती है उसके पूर्वज, वंशधरों का अंश भी उसमें होता है, जैसे कई पुत्र में माता-पिता के चौथाई अंश गुण अवश्य ही रहते हैं जिससे उस संतान पर वही प्रभाव प्रकट हुआ दिखाई पड़ता है।
किसी भी पुत्र में उसके माता-पिता के अधिक से अधिक गुण पाए जाते हैं। लेकिन यह भी देखा गया है कि किसी पुत्र में माता के गुण अधिक पाए जाते हैं तो किसी में पिता के, किसी में एक के गुण अधिक दिखाई देते हैं तो किसी में एक का गुण दूसरे के गुणों से छिप जाता है।
यदि आप अपने संतान के गुणों में सुधार करना चाहते हैं तो आपको प्राकृतिक नियमों के ज्ञान का अनुसरण करना पड़ेगा। जिसके फलस्वरूप कई पीढ़ियों के अनन्तर तथा दोष नष्ट होकर अच्छे गुण का प्रभाव अपने पुत्र में पा सकते हैं। सबसे पहले दम्पतियों को यह सोच लेना चाहिए कि इस प्रकार के परिवर्तन करने से हमारे संतान को कष्टों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस तरह की परिस्थितियों को सोचकर ही बुद्धिमान पुरुष श्रेष्ठ कदम उठा सकते हैं। 
बहुत से वैज्ञानिकों का कहना है कि पुत्र के शरीर की रचना का आधा भाग माता-पिता के गुणों को मिलाकर पूर्ण होता है बाकी आधा पूर्व पुरुषों से या वंश परम्परा से आता है। कहने का अर्थ यह है कि बच्चे के शरीर का आकार, गुण तथा सुंदरता का आधा भाग तो माता पिता से मिलता है तथा बाकी का आधा अपने वंश के पहले के पुरुषों से मिलता-जुलता होता है।
कभी-कभी तो यह भी देखा गया है कि बच्चे में मातृक और पैतृक गुणों में से किसी एक का गुण खत्म सा हो जाता है। कभी तो संतान में माता का गुण पिता के गुणों की अपेक्षा अधिक हो जाता है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होता है कि पिता का गुण संतान में है ही नहीं।
कभी-कभी तो यह भी देखा गया है कि संतान में कुछ ऐसे गुणों का विकास हो जाता है जो न तो मातृक और न ही पैतृक होते हैं। इस स्थिति में कभी-कभी पुत्र में पिता के विलक्षण गुण पाए जाते हैं लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि यह उसके वंश में किसी पहले के पुरुष से कुछ गुण होते हैं। कुछ का तो यह भी कहना है कि इस प्रकार के विभिन्न गुण पीढ़ियों तक छिपे रहते हैं और किसी प्राकृतिक कारण से वे विकसित नहीं हो पाते।
कुछ आचार शास्त्रियों तथा मनु ने माता के अंशपिण्ड और पिता के अंगोत्र कुल में विवाह का नियम बनाया है तथा कुल गोत्र, शाखा व प्रवर आदि सात बातों का विभक्तिकरण है। विवाह में इन संबंध बातों को देख लेना चाहिए।
बहुत से विद्वानों ने यह कहा है कि जो स्त्री माता की 6 पीढ़ी और पिता के गोत्र की न हो वही विवाह के योग्य है।
दस कुल (परिवार) ऐसे होते हैं जिसमें विवाह नहीं करना चाहिए – 
1. जिस कुल में किसी को पेचिश का रोग हुआ हो उससे विवाह न करें।
2. जिस कुल में कोई टी.बी. (यक्ष्मा) के रोग से पीड़ित हो उससे शादी न करें।
3. जिस कुल में किसी को बवासीर हो गया हो उस कुल में विवाह न करें।
4. जिस कुल में किसी के शरीर पर बड़े-बड़े रोग हो उस कुल में विवाह करना उचित नहीं होता है।
5. जिस कुल में कोई विद्वान न हो उस कुल में विवाह करना ठीक नहीं है।
6. जिस कुल में कोई उत्तम पुरुष न हो उसमें शादी न करें।
7. जिस कुल में उत्तम क्रिया न हो उसमें शादी करना उचित नहीं होता है।
8. जिस कुल में किसी को गलित कुष्ठ हुआ हो अर्थात शरीर की त्वचा कट-कटकर गिर रही हो, उस कुल में शादी करना ठीक नहीं होता है।
9. जिस कुल में किसी को श्वेत कुष्ठ (सफेद दाग) हो उस कुल में शादी न करें।
10. जिस कुल में किसी को मिर्गी रोग हो, उस कुल में भी शादी करना अच्छा नहीं रहता है।
अपने से नीच जाति की कन्या से विवाह न करें- 
1. जिस लड़की की त्वचा पीले रंग की हो उससे विवाह न करें।
2. जिस लड़की की आंखे बिल्लौरी हो उससे शादी न करें।
3. अधिक बोलने वाली लड़की अर्थात बतूनी से शादी करना उचित नहीं होता है।
4. जिस लड़की के शरीर पर बड़े-बड़े बाल (रोयें) हो उससे शादी न करें।
5. जिस लड़की के शरीर पर बिल्कुल भी रोयें न हो उससे भी शादी न करें।
6. जिस लड़की के शरीर में अधिक अंग हो उससे शादी न करें। जैसे- छः अंगुली वाली लड़की।
7. रोहिणी, अद्रा, मघा, पूर्वा आदि नक्षत्र के नाम की लड़कियों से शादी न करें।
8. नदी के नाम पर जिस लड़की का नाम रखा गया हो उससे भी शादी न करें, जैसे- गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी आदि।
9. पर्वत के नाम वाली लड़की से भी शादी न करें। जैसे- विध्यांचल, मंदाकिनी आदि।
10. पक्षी के नाम वाली लड़की से शादी न करें जैसे- हंसनी, मैना, सुगनी, पटू आदि।
11. सांप के नाम वाली लड़की से शादी न करें जैसे- नागनी, उरंग, धामनी आदि। 
12. नीच नाम वाली लड़की से शादी न करें जैसे- दासी, छोटी आदि। 
13. भयानक नाम वाली लड़की के नाम से शादी न करें जैसे- कालिका, चंडिका, भवानी, सूर्पंनखा आदि। 
14. जिस लड़की के नाम के पीछे का शब्द मा हो उससे शादी नहीं करनी चाहिए जैसे- कालीमा, लालीमा, मनोरमा आदि।
कैसी कन्या से विवाह करें – 
1. जिस लड़की का नाम सुंदर हो उससे शादी करनी चाहिए जैसे- यशोदा, सौभाग्यवती, कंचन, पारो, कोमल, पारुल आदि।
2. हंस और हाथी के समान धीरे-धीरे चलने वाली लड़की से शादी करना अच्छा होता है।
3. जिस लड़की के रोम छोटे, केश बड़े तथा दांत छोटे हो उससे शादी करें। 
4. जो लड़की मीठी बोलती हो और मृदु अंग वाली हो उससे शादी करें।
5. जो पिता के गोत्र तथा माता की पीढ़ी में न हो उससे शादी करनी चाहिए।
वैसे देखा जाए तो संसार में केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी होता है जिसमें सोचने तथा विचार करने की शक्ति होती है। उसे छोटे से छोटे तथा बड़े से बड़े कार्यों को करने के लिए सोचना तथा विचार करना पड़ता है। इसलिए मनुष्यों को कोई भी कार्य करने के लिए सबसे पहले मन की शक्ति तथा दूसरे अंगों की शक्ति की आज्ञा के अनुसार ही कार्य करना पड़ता है। इस शक्ति की सहायाता के बिना कोई भी कार्य नहीं हो सकता है।
मनुष्य का विचार एक प्रकार के कंपन के समान होता है, यह ठीक उसी प्रकार से लगता है जिस प्रकार से तालाब में एक छोटा सा कंकड़ फेंक देने से उसमें एक लहर उत्पन्न होती है। उसी प्रकार विचार भी एक लहर के समान वातावरण में कंपन उत्पन्न कर देती है।
ईथर एक प्रकार का ऐसा तत्व होता है जो वायुमण्डल में एक सैकेंड में 50 कंपन उत्पन्न करने की शक्ति रखता है। इसके 415 हजार कंपन तक की संख्या को मनुष्य सुन सकता है। ईथर के परमाणु इतने सूक्ष्म हैं कि सोने जैसे धन द्रव्य के एक परमाणु में ईथर के लाखों परमाणु हैं। प्रत्येक विचार जो मस्तिष्क में उत्पन्न होते हैं वे ईथर पर प्रभाव डालते हैं। इस प्रकार ईथर पर हमारे विचार अंकित हो जाते हैं।
कुछ अध्ययनों से यह भी पता चला है कि आचार और स्वभाव इच्छा और आवश्यकता के अनुसार विकसित होना या लोप हो जाना मनुष्य की मन शक्ति पर निर्भर होता है जैसे- सिंह की विकराल मूर्ति उसके तेज स्वभाव के कारण और गाय की शांत मूर्ति उसके शांत जीवन के कारण है। क्या आपको पता है कि जो जानवर पालतू होते हैं उसमें और उसी जाति के जंगली जानवर के स्वभाव में अधिक अंतर देखने को मिलता है। पालतू जानवरों का स्वभाव शांत और जंगलियों का स्वभाव तेज हो जाता है। बहुत से रेंगने वाले जीवों ने सैकड़ों हजारों वर्षों तक पैरों की इच्छा उत्पन्न करके पैर पैदा कर लिए, इसी तरह से मछलियों ने पर उत्पन्न कर लिए। लता और फूलों में भी विचित्र रंग हो गए। यह मानसिक शक्ति का ही प्रभाव है। इस प्रकार की बातों से हमें यह पता चलता है कि मानसिक शक्ति बच्चे के विकास में कितनी सहायक है। उदाहरण के लिए श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के प्रेम का ही फल था कि श्रीकृष्ण का पुत्र श्रीकृष्ण के समान था। वे इस प्रकार कृष्ण से मिलते-जुलते थे कि उन्हें यह लगता था कि क्या यह मैं ही तो नहीं हूं। प्रद्युम्न का रूप ही नहीं गुण भी कृष्ण से मिलता था।
एक बार एक दम्पत्ति ने एक सुंदर बालक का चित्र खरीदा और जब गर्भवती हुई तो वह उस चित्र को रोज गौर से देखा करती थी और जब उसने एक बालक को जन्म दिया तो यह देखा कि उस चित्र वाले बालक से कुछ-कुछ शक्ल उसके बालक का मिलता-जुलता था।
हम एक घटना और भी बताना चाहते हैं कि एक बार एक स्त्री अपने बच्चे को अफीम खिलाकर कहीं चली गई थी लेकिन अफीम की मात्रा बढ़ जाने से उसके बच्चे की मृत्यु हो गई। इससे स्त्री को बहुत दुःख हुआ। उसी दशा में उसे फिर गर्भ ठहर गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि जो बच्चा पैदा हुआ वह रोगी और कमजोर था। उसे जन्म से ही मस्तिष्क विकार था, दो वर्ष रो

शुक्रवार, 8 मार्च 2013

रंग दिखाने लगी ससुराल जाते

शादी करके मैं ससुराल आई, पहली रात मुझे डर था कि मेरी चोरी न पकड़ी जाए क्यूंकि शादी से पहले ही में कई लड़कों के साथ रंगरलियाँ मना चुकी हूँ, मैंने बहुत फ़ुद्दी मरवाई थी।पहली रात तो बच गई रस्मों के चलते पंजाब में अभी गाँव में भी और शहरों में भी पहली रात लड़की अपने साथ मायके से भाई को लाती है या बहन को।दूसरी रात को मुझे कमरे में बिठा दिया गया था घूंघट में। मैं उनका इंतज़ार कर रही थी, वो आये मेरी धड़कन बढ़ने लगी, दरवाज़ा बंद किया और मेरे करीब आये, उन्होंने दारु पी रखी थी, काफी पी हुई थी। मेरी चुनरी उतार कर ये मुझे पकड़ कर चूमने लगे, बोले- वाह ! कितनी खूबसरत हो !वो नशे में थे, मेरी भाभी जो कि मेरी हमराज़ थी, ने मुझे कहा था कि जब वो लौड़ा घुसाने लगें तो तू सासें खींच लेना और जांघें कस कर दर्द की एक्टिंग करना ! इन्होंने मुझे ऊपर से नंगी कर लिया और मेरा दूध पीने लगे- हाय ! क्या मस्त मम्मे हैं तेरे !मेरे निप्पल को काट दिया, मैं बहकने लगी, दिल करने लगा उनका लौड़ा पकड़ कर सहलाऊँ, चूसूँ !लेकिन खुद को शरीफ दर्शाना था, अपनी वासना अपने दिल में दबा ली।ये मेरे ऊपर चढ़ गए, मेरे होंठ चूसते हुए नीचे से मेरी सलवार का नाड़ा खिसका दिया खुद के कपड़े नहीं उतार रहे थे। सलवार उतार, पैंटी खिसका मेरी फ़ुद्दी को चाटने लगे।मैं कसमसाने लगी, मैंने हाथ ले जाकर इनका लौड़ा पकड़ लिया। वो अभी भी पूरा खड़ा नहीं था, मुझे तो देख कर ही लड़कों के कपड़ों में खड़े हो जाते थे, फिर इन्होंने तो मुझे नंगी किया था।फिर भी मैंने इनका पजामा खोल दिया और लौड़े को पकड़ कर देख मेरे सपने टूटने लगे, इतना छोटा लौड़ा ! पतला सा !मेरे अंदर क्रोध से भरी आग लग गई लेकिन इन्होंने मेरी फ़ुद्दी को चाटना ज़ारी रखा मुझे उसी से शांत करने का इरादा था।अतिम पलों में अपना छोटा सा लौड़ा घुसा झटके दिए, मैंने सांसें भी खींची, जांघें भी कस ली फिर भी इनका आसानी से घुसने लगा था दो मिनट में अपना पानी निकाल हांफने लगे, बिना कोई ज्यादा बात किये सो गए।पहली रात मेरी चोरी नहीं पकड़ी गई लेकिन दिल भी टूट गया।सुबह एक रस्म थी, मेरे सामने बैठे थे मेरे ननदोई जी। हट्टे-कट्टे थे, चौड़ा सीना, घने बाल, मरदाना मूछें !मेरी नज़र उनसे टकरा गई, वो पहले दिन से मुझे बहुत प्यासी नज़रों से देखते थे लेकिन नई नई शादी का लिहाज कर मैंने उनको शह नहीं दी थी। लेकिन सुहागरात के बाद आज मैंने भी अपनी आँखों में सूनापन दिखा दिया।हमारी शादी के तीन दिन बाद ही मेरी सबसे छोटी ननद की भी शादी रखी थी, मेरी तो शादी नई हुई थी, मेहँदी वगैरा पहले लगी थी, ना मुझे पार्लर की ज़रुरत थी।दोपहर को ही दारू का दौर चला बैठे ननदोई जी !सासू माँ ननद को लेकर बाज़ार चली गई थी, बाकी सभी घर के मर्द बहन की शादी का इंतजाम कर रहे थे, घर में आखिरी शादी थी, कसर कोई छोड़ना नहीं चाहता था, पति देव अपनी बहनों- भाभियों को लेकर शहर मार्केट ले गए मेहँदी लगवाने, ससुर जी के साथ बैठ ननदोई सा पैग-शैग का लुत्फ़ उठाते रहे, मैं उठकर अपने कमरे की तरफ चल दी।मुझे उम्मीद थी कि ननदोई जी सुबह मेरी आँखों में जो प्रश्न थे, उनका उत्तर जानने वो आयेंगे ही।मैंने चुनरी उतार बिस्तर पर डाल दी और बाथरूम में चली गई।मेरा कमीज़ काफी गहरे गले का था जिससे मेरी चूचियों का चीर बेहद आकर्षक दिख रहा था, जिसमें काला मंगलसूत्र खेल रहा था।मुझे यह उम्मीद थी कि शायद ननदोई जी आयें !मेरी कमीज़ छाती से काफी कसी हुई रहती है क्यूंकि मुझे अपने मम्मे दिखाने का शुरु से शौक था।जब बाथरूम से निकली थी तो सामने ननदोई जी को देख में इतना हैरान नहीं थी, फिर भी शर्माने का नाटक किया- आप यहाँ?अपनी चुनरी पकड़ने लगी।मेरे से पहले उन्होंने पकड़ ली, बोले- इसके बिना ज्यादा खूबसूरत दिखती हो !मेरे गाल लाल होने लगे- प्लीज़ दे दो ना !”क्या हुआ? नई भाभी, सुबह तो आपकी नज़रों में कुछ था? लगता है कि हमारे साले साब पसंद नहीं आये या फिर वो कुछ??” कहते कहते रुक गए, मेरे करीब आये बोले- लाओ मैं अपने हाथों से चुनरी औढ़ा देता हूँ।”वो मेरे बेहद करीब थे, चुनरी तो दे दी, उसको गले से लगा दिया ताकि मेरी छाती के दीदार उनको होते रहें।”मंगलसूत्र कितना प्यारा लग रहा है !” उसको छूने के बहाने मेरे चीर को उंगली से सहला दिया।मेरा बदन कांप सा गया, सिहर सी उठी।”क्या हुआ भाभी?” उंगली मेरी कमीज़ के गले पर अटका कर खींचा, अन्दर झांकते हुए बोले- वाह क्या खूबसूरत वादियाँ हैं?”प्यार से मेरे मम्मे को सहलाया।”प्लीज़ छोड़ दीजिये, कोई देख लेगा, आते बदनाम हो जाऊँगी !”"यहाँ कौन है भाभी? ससुर जी तो उलटे हो गए पी पी कर ! देखो, दरवाज़ा मैंने बंद किया हुआ है ! क्या देख रही थी आप सुबह?”मेरी कमर में बाजू डालते हुए अपनी तरफ सरकाया मेरी छाती उनके चौड़े सीने से दबने लगी।”वाह कितना कसाव है आपकी छाती में, मेरी बीवी तो खस्ता हो गई है।”मैं उनके सीने पर नाज़ुक उँगलियाँ फेरती हुई बोली- क्या खस्ता हो गया उनमें?”सब कुछ ! बिखर गई है !” मेरे होंठ चूमते हुए बोले- रात कैसी निकली भाभी? सही सही बताना !”इनको प्यार करना नहीं आता, औरत की फीलिंग नहीं भांपनी आती, खुद सो गए, मैं पूरी रात झल्लाती रही हूँ।”मुझे घुमा लिया, पीछे से मुझे बाँहों में कस लिया कमीज़ को उठाया और अपना हाथ मेरे सपाट चिकने पेट पर फेरने लगे। मेरे जिस्म में आग लगने लगी।पीछे से मेरी उभरी हुई गांड पर दबाव डाला मुझे इनका लौड़ा खड़ा महसूस हुआ, मैंने भी चूतड पीछे की तरफ धकेले- हाय, एक आप हैं, देखो प्यार करने का अंदाज़ ! आपने अपने हाथों के जादू से मुझे खींच लिया है, वैसे आप बहुत ज़बरदस्त मर्द दिखते हैं।”"असली मर्दानगी तो अभी दिखानी है।” मेरी गर्दन को चूमने लगे।यह औरत को गर्म करने की सबसे सही जगह है। एक हाथ पेट पर था, होंठ गर्दन पर !जीजा जी?” मेरे पति बोले।”यह होटल के कमरे की चाभी है साले साहेब ! नई नई शादी हुई है और घर में कितनी भीड़ है। एक साथ दो दो शादियाँ रख दी गई, मेरे और ॠतु की तरफ से यह स्वीट आपके लिए बुक करवा हुआ है मैंने !” ननदोई जी ने बताया।शर्म से आंखें झुका ली मैंने ! पता नहीं क्या पैंतरा होगा यह ननदोई जी का?”नहीं दीदी, हमें तो सबके साथ रहना है।” मैंने कहा।”शोभा, तब तक संगीत ख़त्म हो जाएगा ! रात ही तो जाना है, हमें कुछ नहीं सुनना !” मेरी ननद बोली।ननदोई जी इनको अपने साथ ले गए, इनको अपनी कार की चाभी भी दे दी, और इकट्ठे बैठ कर दारु पीने लगे, ननदोई जी ने इन्हें भी काफी पिला दी।अचानक से ननदोई जी फ़ोन सुनने के लिए एक तरफ़ गए, फिर ननद के पास गए, बोले- मुझे अभी चंडीगढ़ के लिए निकलना होगा, सुबह आठ बजे एक एहम मीटिंग आ गई है।फ़िर हम दोनों को बुला कर बोले- यार शरद, मुझे अभी चंडीगढ़ निकलना है, माफ़ करना, कार की चाभी मांग रहा हूँ।”कोई बात नहीं जीजा जी, ऐसा करो, मैं तुम दोनों को होटल छोड़ता हुआ निकलता हूँ, सुबह कैब से लौट आना ! ठीक है?”लेकिन खाना?” दीदी बोली।”इनका वहाँ डिनर भी साथ प्लान है और मैंने तो काफी स्नैक्स खाएं हैं चिकन के !”हम वहाँ पहुँच गए आलीशान होटल में ! इनको काफी चढ़ चुकी थी, ये बोले- जीजा जी, डिनर हमारे साथ करके निकल जाना, तब तक पैग शैग हो जाए?ननदोई जी बोले- चल ठीक है।बोतल मेज पर सज गई, मोटे मोटे पैग बनाये, ननदोई जी ने तो अपना थोड़ा पिया, इन्होंने एक सांस में पूरा खींच मारा।मैंने सामने देखा उन्होंने मुझे आँख मारी- तेरा पैग ख़त्म हो गया, यार खाली ग्लास अच्छा नहीं लगता पकड़ यह !ये वहीं लुढ़कने लगे।”खाना कमरे में मंगवा लेते हैं।”एक बहुत प्यारा सा कमरा था, बड़ी मुश्किल से ये कमरे तक गए। मैंने अपना सूटकेस रख दिया, उसमें से गुलाबी रंग की बेहद आकर्षक पारदर्शी नाईटी निकाली क्यूंकि मैं ननदोई जी का पैंतरा समझ गई थी।जब मैं वाशरूम गई, ननदोई जी ने इनको फ़िर मोटा पैग लगवा दिया, ये सोफे पर लुढ़क गए, ननदोई जी ने इन्हें उठाकर बिस्तर पर लिटाया, मुझे देखा तो देखते रह गए।”इसको तो हो गई।”जूते उतारे, कम्बल देकर सुला दिया और मुझे बाँहों में लेकर बोले- बहुत हसीन दिख रही हो रानी !मैंने उनके गले में बाहें डालते हुए उनके होंठों पर होंठ रखते हुए कहा- आपका दिमाग बहुत तेज चलता है?बोले- बियर भी है, एक छोटा सा लोगी? सरूर आ जाएगा।उनके कहने पर मैं एक मग बियर गटक गई, मुझे सरूर हुआ उठकर उनकी गोदी में बैठ गई, आगे से नाईटी खोल दी, काली ब्रा में कैद मेरे मम्मे देख उनका तन तन जा रहा था।ननदोई जी मेरे मम्मे दबाने लगे, मैं सी सी कर रही थी। ब्रा की साइड से निकाल मेरा निप्पल चूसा।”ये कहीं उठ गए तो पकड़े जायेंगे !”"बहुत तेज़ दारु पी है इसने ! वो भी नीट के बराबर !”बोले- डोंट वरी, मैंने दो रूम आगे एक अलग स्वीट बुक किया है हम दोनों के लिए !”इनको सुला कर हम बाहर से लॉक कर चाभी लेकर दूसरे स्वीट में चले गए, वहीं बैठ एक एक मग बियर का पिया, मैंने मेज से सामान उठाया, नाईटी उतार फेंकी, ननदोई जी के सामने नंगी होकर बिस्तर पर लहराने लगी।”हाय मेरी जान शोभा ! बहुत मस्त अंदाज़ की औरत मिली है साला साहेब को !:उन्होंने बोतल पकड़ी मेरे मम्मों पर दारु बिखेरी जो मेरी नाभि में चली गई।ननदोई जी चाटते हुए नीचे आ रहे थे, मेरा बदन वासना से जलने लगा।ऐसे कामुक अंदाज़ कभी नहीं अपनाए, किसी ने मेरे बदन पर ऐसे खेल नहीं खेले थे, जब ननदोई जी ने नाभि से दारु चाटी, मैं कूल्हे उठाने लगी, इन्होंने मेरी पैंटी खींच दी।”हाय, कितनी प्यारी फ़ुद्दी है ! कितनी चिकनी की हुई है मैडम आपने !”मेरी फ़ुद्दी चाटने लगे तो मुझे लगा कि मैं वैसे ही झड़ जाऊँगी, पर मैंने उनको नहीं रोका।उन्होंने मुझे उल्टा लिटाया, मेरी पीठ पर दारु डाल डाल कर चाटने लगे, मेरे चूतड़ों पर दारु टपका कर चाटने लगे।हाय ! मैं ऐसे मर्द के साथ पहली बार थी जो औरत को इतना सुख देता हो !”दीदी ऐसा करने देती हैं क्या?”"हाँ शुरु में मैंने उसको बहुत खिलाया है, अब उसके जिस्म का वो आकार नहीं रह गया जिसको सहलाया जाए, दारु डाल कर चाटी जाए !”वो बोले- चल ननदोई का लौड़ा चाट !मैं भी पूरी रंडी बनकर दिखाना चाहती थी, उनकी आँखों में देखते हुए मैं नीचे से उनके लौड़े को जुबां से चाटते हुए सुपारे तक ले गई, वहाँ से रोल करके लौड़ा चूसा।”हाय मेरी रानी ! मजे से चाट-चूम ! जो तेरा दिल आये कर इसके साथ !”उनका नौ इंची लौड़ा सलामी दे दे कर मेरे अरमान जगा रहा था, मैं खूब खेल रही थी।फ़िर बोले- चल एक साथ करते हैं !69 में आकर मैं उनके लौड़े को चूसने लगी, वो मेरी फ़ुद्दी को चाटने लगे, उंगली से फैला कर दाने को रगड़ते हुए बोले- वैसे काफी ठुकवाई है तुमने !आपको किसने कह दिया जनाब?”"तेरी फ़ुद्दी बोल रही है ! बहुत बड़े शिकारी हैं शोभा हम ! साले साब ने नहीं घुसया क्या?”"इनका बहुत पतला और बहुत छोटा है राजा, घुसाया तो है लेकिन मुझे पूरी रात जलाया भी था।”कुछ देर एक दूजे के अंगों को चूमते रहे, फिर मेरी टांगें उठवा दी और अपने मोटे लौड़े को धीरे धीरे से प्रवेश करवाने लगे, मुझे सच में दर्द हुई, काफी मोटा था। “कैसी लगी फ़ुद्दी? खुली या सही?”"नहीं नहीं ! सही है रानी !” पूरा झटका दिया मेरी सिसकारी निकल गई- आ आऊ ऊऊऊउ छ्हह्ह्ह !वे जोर जोर से पेलने लगे, मैं उनका पूरा पूरा साथ सिसक सिसक कर दे रही थी।ननदोई जी ने मेरी टांगों को हाथों में पकड़ लिया और वार पर वार करने लगे, इससे पूरा लौड़ा घुसता था, कभी घोड़ी बनाते, कभी टांगें उठा उठा कर मेरी लेते रहे।बहुत देर में जब उनका निकलने वाला था तो कहा- कहाँ निकालूँ रानी? बच्चा जल्दी करना है तो अन्दर निकाल देता हूँ, मेरे स्पर्म बहुत मजबूत हैं।”रुको मत ! जो करना है, अंदर करो मेरे राजा ! हाय, जोर जोर से करो ना !”उन्होंने अपना पूरा बीज मेरे पेट में निकाला, मैंने उनका गीला लौड़ा चाट चाट कर पूरा साफ़ कर डाला।”आज मजा आया या कल रात को आया था?”"वो रात मैं भूलना चाहती हूँ वैसी झल्लाती मुझे आज तक किसी ने नहीं छोड़ा था।”"बहुत मस्त माल है तू शोभा ! पसंद आई बहुत ! तेरे चूतड़ बहुत नर्म हैं !” मेरी गाण्ड पर थपकी लगाते हुए बोले।एकदम से दोनों चूतड़ फैला कर गांड देखने लगे- इसमें भी डलवाया है कभी क्या?”आपके इरादे खराब हैं ! आप उन्हें देख कर आओ पहले !”वो जल्दी से उन्हें देख कर आये, बोले- सो रहा है, घोड़ी बन कर गांड को शेक कर जरा !”मैं कोठे पर बैठी हूँ क्या जो आप यह सब करवा रहे हैं?” लेकिन मैंने उनका कहना माना।जब मैं अपनी गाण्ड शेक कर रही थी तो गांड को थपकी देते फैलाया, छेद पे थूका, ऊँगली सरकाई- दी है ना पहले कभी?”लेकिन उसका आपका जितना बड़ा नहीं था !”"चल एक एक पैग लगाते हैं, फिर तुझे कुछ नहीं होगा।”"बहुत कड़वी है।”"खींच जा बस !”मुझे काफी नशा होने लगा था, बियर की बोतल पकड़ कर मुझे घोड़ी बना दिया, पहले गाण्ड पर बियर डाल कर चाटी, खाली बोतल को गाण्ड में घुसाने लगे।यह क्या?”"इससे तेरी ढीली करूँगा !”उनका ज़ालिम लौड़ा फिर से खड़ा था, उसको फ़ुद्दी में घुसाते हुए बियर की बोतल को गांड में देने लगे। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।”हाय ! प्लीज़ ! यह क्या?”फिर बोतल निकाल जोर से लौड़ा उसमें घुसा दिया और पेलने लगे।”हाय फट गई मेरी ! मत करो !”लेकिन उन्होंने पूरी मर्दानगी मेरी गांड पर उतार दी, नशा ना किया होता तो मर ही जाती मैं !उन्होंने जोर जोर से गांड मारी, पूरी रात ननदोई जी ने मेरे बदन का कचूमर निकाल दिया, अंग अंग ढीला कर दिया मेरा !फिर मैं सुबह तीन बजे पति के कमरे में गई और वहीं लेट गई, थकान से कब नींद आई पता नहीं चला।सुबह आठ बजे पति ने मुझे जगाया।”मैं आपसे नाराज़ हूँ, उन्होंने इतना महंगा होटल बुक किया, महंगा कमरा और आपको याद भी नहीं होगा कि कितनी मुश्किल से आपको लिटाया था मैंने !”"आगे से कम पियूँगा।”हम घर लौट आये, आँखों में नशा और नींद दोनों थी।ननदें मज़ाक करने लगी- लगता है पूरी रात को सोये नहीं?ननदोई जी खुद दोपहर को लौटे, रात हुई, काफी मेहमान आ चुके थे, सोने के इंतजाम किये थे।रात को सभी नाचने लगे, डी.जे लगवा लिया था।पति देव पैलेस चले गए थे पूरा कामकाज देखने के लिए, हलवाइयो की निगरानी भी करनी थी।सभी थक कर चूर हो गये, खाना-वाना खाया, जिसको जहाँ जगह मिली, वहीं सो गया।नीचे बिस्तर लगाए थे, सासू माँ ने मुझे कमरे में भेज दिया, बोली- वहीं जाकर सो जा !सभी सो गए, मुझे भी नींद आ गई, काफी रात को मैंने अपने ऊपर किसी को महसूस किया।बोले- मैं हूँ।”आप फिर?”ननदोई जी ही थे।”आज भी?”"चुप ! तेरी आदत लग गई है, रानी जरा सलवार ढीली कर ले !”"आप भी ना? कोई आ गया तो?”सभी थक कर सो गए, हम नाचे नहीं थे इसलिए थके नहीं, थकने आये हैं !” वो लौड़ा लेकर सिरहाने की तरफ सरक गए जिससे उनका नाग देवता मेरे होंठों से टकरा गया।मैंने झट से मुँह में लेकर चुप्पे मारे ,सलवार खोल कर बोली- आज खुलकर खेलने का दिन नहीं है !”हाँ हाँ !”मैंने टाँगें उठाई और जल्दी से घुसवा लिया और दनादन झटके लगा लगा कर दस मिनट में ही आज वो पानी निकाल गए।उनको जब में कमरे से बाहर निकालने गई, मुझे लगा कि किसी ने देखा ज़रूर है, यह नहीं पता चला कि कौन था।वो तो चले गए, मैं घबरा गई।
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