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शुक्रवार, 29 मार्च 2013

बहुत बेताब हो मुझे चोदने के लिए

चौकीदार के जाते ही मैंने दरवाजा अंदर से बंद किया और पकड़ कर पायल को अपनी बाहों में भर लिया।
"बहुत बेताब हो मुझे चोदने के लिए...?"
पायल के मुख से यह 'चोदना' शब्द सुन एक पल को तो मैं हैरान रह गया लेकिन मैं बोला- मेरी जान कल रात से तड़प रहा हूँ तुम्हें पाने के लिए... अब तो बेताबी की हद हो गई है।
मैंने पायल को अपनी बाहों में उठाया और बेड पर लेटा दिया। उसने मुझे दो मिनट रुकने के लिए कहा और फिर अपनी सारी ज्वेलरी आदि उतार कर एक तरफ रख दी और फिर खुद ही आकर मेरी गोद में बैठ गई।
मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था। मैंने बिना देर किये अपने होंठ पायल के होंठों पर रख दिए और मेरे हाथ सीधा पायल की मस्त चूचियों को दबाने लगे थे। पायल भी जैसे प्यार के लिए तड़प रही थी। वो भी पूरी मस्ती में मेरे किस का जवाब दे रही थी।
करीब पाँच मिनट तक किस करने के बाद मेरे हाथ पायल के बदन से कपड़े कम करने में व्यस्त हो गए। पायल ने लहँगा-चोली पहना हुआ था। मैंने पहले उसकी चोली की डोर ढीली करके उसे उसके बदन से अलग किया। ब्रा में कसी उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ हिमालय को भी नीचा दिखा रही थी। मैं पायल की चूचियों पर टूट पड़ा और मस्त होकर उसकी चूचियों को उसकी ब्रा के ऊपर से ही चूमने चाटने लगा।
पायल की सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगी थी। तभी मैंने पीछे हाथ ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया तो दोनों बड़े बड़े खरबूजों जैसे चूचियाँ उछल कर मेरे सामने लहराने लगी।
पायल की चूचियाँ एकदम खड़ी खड़ी और तनी हुई थी। चूचियों के चुचूक भूरे रंग के थे और गोरी गोरी चूचियों पर इतने मस्त लग रहे थे कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और मैंने झट से उसके बाएँ चुचूक को अपने होंठों में दबा लिया और चूसने लगा। मैं बेरहमी से पायल की चूचियाँ मसल रहा था और उसके चुचूक को दांतों से काट रहा था।
"आह... खा जाओ राज.... आह... ओह्ह... पी जाओ मेरी चूचियों को..." पायल मस्ती में बड़बड़ा रही थी।
मेरा लण्ड भी अब पैंट से बाहर निकलने के लिए उछल कूद मचा रहा था। पायल ने जैसे उसकी परेशानी को समझ लिया था तभी तो उसने हाथ बड़ा कर पैंट के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया था। पर अब तो लण्ड पैंट से बाहर आकर अपना जलवा दिखाना चाहता था।
मैंने झट से अपनी पैंट खोली और अंडरवियर सहित एकदम से नीचे कर दी। लण्ड महाराज पैंट से निकल कर तोप की तरह तन कर खड़े हो गए।
मैंने पायल का हाथ पकड़ा और लण्ड पर रख दिया। लण्ड हाथ में आते ही पायल उछल पड़ी और वही शब्द ‘जो मैं पहले भी कई लड़कियों और औरतों के मुँह से सुन चूका था’ पायल के मुँह से निकले।
"हाय राज... तुम्हारा तो बहुत मोटा है !"
लण्ड भी अपनी तारीफ सुन कर पायल के हाथों में ही खुशी से उछलने लगा। कुछ देर हाथ से सहलाने के बाद पायल घुटनों के बल बैठ गई और अगले ही पल मैं जन्नत में था क्यूंकि पायल ने मेरा लण्ड अपने कोमल कोमल होंठों में जो दबा लिया था। पायल मस्त होकर मेरा लण्ड चूसने और चाटने लगी। मेरे मुँह से भी मस्ती भरी आहें निकल रही थी। मैं पायल के बाल पकड़ कर लण्ड को पूरा उसके मुँह में डाल रहा था और पायल भी जीभ घुमा घुमा कर मेरा लण्ड चूस रही थी।
कुछ देर बाद मैंने पायल को खड़ा किया और फिर हम दोनों ने एक दूसरे के बाकी बचे कपड़े भी उतार दिए। अब हम दोनों कमरे में बिल्कुल नंगे थे।
दोनों के नंगे बदन फिर से एक दूसरे से लिपट गए। मैंने उसको बिस्तर पर लेटाया और उसकी क्लीन शेव चूत के ऊपर जीभ रगड़ने लगा। पायल मस्त हो उठी और उसकी चूत जो पहले से ही गीली हो चुकी थी एक बार फिर से पानी पानी हो गई। पायल मेरे लण्ड को पकड़ पकड़ कर खींच रही थी। मैं बिस्तर के ऊपर आ गया और फिर हम 69 की अवस्था में आ गए। अब पायल मेरा लण्ड चूस रही थी और मैं पायल की चूत चाट रहा था।
पायल की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी और अब मेरा लण्ड भी झड़ने के कगार पर था। मैं अभी झड़ना नहीं चाहता था। इसीलिए मैंने लण्ड पायल के मुँह से निकाल लिया और उसकी टांगों के बीच में आकर बैठ गया। पायल की चूत कमरे की दूधिया रोशनी में चमक रही थी। मैंने देर न करते हुए लण्ड को पायल की चूत के छेद पर लगाया तो पायल ने भी अपने चूतड़ ऊपर उठा कर मेरे लण्ड का स्वागत किया।
मैं लण्ड को चूत के छेद रगड़ रहा था। तभी मैंने एक जोरदार धक्के के साथ आधे से ज्यादा लण्ड पायल की चूत की गहराई में उतार दिया।
पायल की चीख निकल गई।
वो तो मैंने उसकी मुँह पर हाथ रख दिया नहीं तो पूरा गेस्ट हाउस जाग जाता।
"राज... धीरे धीरे करो... तुम्हारा लण्ड बहुत मोटा है।"
मैंने लण्ड को बाहर खींचा और इस बार थोड़ा आराम से लण्ड को अंदर डाला। पायल की चूत बहुत कसी थी। चूत की दीवारें लण्ड को जकड़े हुए थी। लगता नहीं था कि यह किसी शादीशुदा औरत की चूत है।
मैंने लण्ड एक बार फिर बाहर निकाला और फिर एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लण्ड पायल की चूत में घुसा दिया। लण्ड सीधा पायल की बच्चेदानी से टकराया था।
पूरा लण्ड चूत में डालने के बाद मैं कुछ देर पायल के ऊपर लेटा उसके होंठ और चूचियों को चूमता रहा। पायल ने भी अब अपने कूल्हे उछालने शुरू कर दिए थे। मैंने भी अब पायल की गर्म गर्म चूत में लण्ड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया और फिर धीरे धीरे स्पीड बढ़ाते हुए पायल की चूत चोदने लगा। पायल भी गाण्ड उछाल उछाल कर मेरा लण्ड अंदर तक ले रही थी।
"चोद... चोद मेरे राजा... चोद मुझे... जोर जोर से चोद.... फाड़ दे मेरी चूत... चोद मुझे... साली को पहली बार कोई मस्त लण्ड मिला है... आज तो फाड़ डाल मेरे राजा..."
"कल से मेरे लण्ड की हालत खराब कर रही थी... चुद अब मेरी जान चुद...फड़वा ले अपना भोसड़ा !"
चुदाई अपने पूरे शबाब पर थी। धक्के दुरंतो की गति से में चल रहे थे। पायल की चूत पानी पानी हो रही थी। दस मिनट की चुदाई में दो बार झड़ चुकी थी पायल। कमरे में अब फच्च फच्च का मादक संगीत गूंज रहा था।
कुछ देर ऐसे ही चोदने के बाद मैंने पायल को घोड़ी बनाया और पीछे से लण्ड उसकी चूत की गहराई में उतार दिया और पूरे जोश के साथ पायल की चुदाई करने लगा।
बीस मिनट तक बिस्तर पर भूचाल आया रहा और फिर मेरा लण्ड भी पायल की चूत को प्रेमरस से भरने के लिए तैयार हो गया। मैंने पायल से पूछा- मैं झड़ने वाला हूँ तो?
उसने मुझे चूत में ही झड़ने के लिए कहा। फिर मैं ज्यादा देर अपने आप को रोक नहीं पाया और तेज तेज धक्के लगाते हुए पायल की चूत में झड़ने लगा। ढेर सारा प्रेम रस यानि वीर्य मैंने पायल की चूत में भर दिया। पायल लण्ड अंदर लिए लिए ही नीचे लेट गई और मैं भी उसके ऊपर लेट गया। हम दोनों ही लम्बी लम्बी साँसें ले रहे थे।
कुछ देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद हम दोनों अलग हुए। पायल के चेहरे पर संतुष्टि के भाव स्पष्ट पढ़े जा सकते थे। वो आँखें बंद किये कुछ देर पहले हुई चुदाई के आनन्द सागर में गोते लगा रही थी।
मैंने पायल को हिला कर उठाया। वो उठी और मेज़ पर से नेपकिन उठा कर मेरा लण्ड और अपनी चूत साफ़ करने लगी। यह पायल के हाथों का ही जादू था कि पायल के हाथ में जाते ही लण्ड एक बार फिर से सर उठाने लगा। पायल मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई और बोली- तुम्हारा लण्ड बहुत शैतान है... अभी अभी मेरी मुनिया की कुटाई की है और अब देखो फिर से कैसे अंगडाई ले रहा है।
"तो पकड़ कर साले के बल निकाल दो ना मेरी जान..."
पायल मुस्कुराई और फिर कुछ सोच कर लण्ड को अपने मुँह में भर लिया।
लण्ड ने खड़ा होने में बिल्कुल भी देर नहीं लगाई और कुछ ही देर में एक बार फिर से चुदाई के लिए तैयार हो गया।
पायल ने मुझे नीचे लेटाया और खुद ऊपर आकर मेरे लण्ड पर अपनी चूत रख कर बैठ गई। लण्ड पायल की चूत में ऐसे घुस गया जैसे माखन में चाकू। पूरा लण्ड अंदर लेने के बाद पायल ऊपर नीचे होकर लण्ड अंदर-बाहर करने लगी और मैं उसके अपने सीने पर झूलते मोटे मोटे खरबूजों को मसलने और चूसने लगा।
अगले आधे घंटे तक मस्त चुदाई चली। कभी पायल ऊपर कभी मैं ऊपर। पायल तीन बार और झड़ चुकी थी और अब उसमें उठने की भी ताकत नहीं बची थी।
मैंने भी एक बार फिर से पायल की चूत को अपने गर्म गर्म वीर्य से भर दिया और एक दूसरे को बाहों में लिए लेटे रहे। तभी घड़ी पर नजर गई तो पाँच बजने में दस मिनट बाकी थे। मैंने पायल को उठाया और तैयार होने के लिए कहा।
पायल बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर आई और फिर मेरे सामने ही खड़ी होकर तैयार होने लगी। मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए थे।
साढ़ पाँच बजे हम दोनों तैयार होकर निकले।
जब हम पैलेस पर पहुँचे तो विदाई का कार्यक्रम चल रहा था। हम दोनों ने भी गाड़ी डोली की गाड़ी के पीछे पीछे लगा दी और बारात के साथ साथ घर पहुँच गए। महक को छोड़ कर किसी को भी शक नहीं हुआ था।
अगले दिन दिनभर सोने के बाद रात को मैं वापिस दिल्ली के लिए तैयार हो गया तो पायल भी मेरे साथ ही तैयार हो गई। विक्रम से विदा लेकर मैं बस स्टैंड पर जाने के लिए निकला तो विक्रम अपनी गाड़ी में मुझे और पायल को छोड़ने हमारे साथ आया। बस स्टैंड पर छोड़ कर विक्रम वापिस चला गया।
मैंने पायल से पूछा- क्या प्रोग्राम है?
तो वो बोली- बस पकड़ कर चलना है और क्या?
पर मेरे होंठों की मुस्कान देख कर वो मेरा इरादा समझ गई। फिर हम दोनों बस स्टैंड के पास के ही एक होटल में चले गए और रात को दो बजे तक दो बार चुदाई का आनन्द लिया और फिर अढ़ाई बजे रात को हम दिल्ली की बस में सवार हो गए।
उसके बाद पायल मुझे दिल्ली में बहुत बार मिली और हम दोनों ने चुदाई का भरपूर आनन्द लिया।
दोस्तों जवानी सिर्फ चार दिन की है और मैं अपने ये चार दिन भरपूर मस्ती में बिताना चाहता हूँ और बिता भी रहा हूँ। आगे भी अपने और किस्से आप लोगों तक पहुँचाता रहूँगा। ये किस्सा कैसा लगा मेल लिख कर जरूर बताएँ।
आपका अपना राज

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